महेंद्रगढ़। शहर में नगर पालिका प्रधान और पार्षद अपनी अलग-अलग खिचड़ी पका रहे हैं जबकि जनता मुंह ताकने को विवश है। जनता के चुने हुए प्रतिनिधि अब जनता को ही भाव नहीं दे रहे हैं। प्रधान और पार्षदों की खींचतान में शहर के 30 एजेंडे अटके हुए हैं।
खास बात ये है कि नपा हाउस की खींचतान के चलते तीन बैठकें रद्द होने पर भी डीएमसी या विधायक इस मामले में संज्ञान नहीं ले रहे हैं। शहर में विकास हुए 10 साल बीत गए हैं। अब तक न तो शहर की सड़कें बन पाई हैं न ही यहां नागरिकों को घर से कचरा उठान जैसी सुविधा मिल रही।
वहीं दो बैठकें हंगामे की भेंट चढ़ी तो एक कोरम के अभाव में स्थगित रही। बैठक में एजेंडे तो रखे जाते हैं लेकिन पार्षद उनका विरोध करते हैं। एजेंडा सुनते ही सभी भड़क जाते हैं। बैठक में पार्षद कम और प्रतिनिधि अधिक मौजूद रहते हैं तो सबसे अधिक हल्ला बोल भी उनकी ओर से ही होता है।
नगर पालिका का पिछला कार्यकाल भी हंगामा और अव्यवस्थित रहा और इस बार भी ऐसा ही हो रहा है। ऐसे में शहर के विकास की आस लगाए बैठे लोगों को कुछ नसीब नहीं हो रहा है। हर साल शहर की दशा बदत्तर होती जा रही है।
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हर बार बैठक में हंगामे की बात ही सुनने को मिल रही है। इसका खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। प्रधान व पार्षदों को तालमेल बनाकर शहर के विकास पर ध्यान देना चाहिए। -दिनेश वैद्य, ब्राह्मण सभा प्रधान महेंद्रगढ़
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नागरिकों को प्रतिनिधियों से विकास की उम्मीद थी और इसीलिए उन्हें चुना था। अब सभी अपने स्वार्थ के वशीभूत होकर शहर का विकास ठप कर रहे हैं। -बिजेंद्र यादव, पूर्व प्रधान नगर पालिका, महेंद्रगढ़
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शहर पहले से ही विकास में पिछड़ा है। जनता ने पार्षद बनाए हैं और जनता के लिए कार्य करना उनका फर्ज है। बैठकों में पार्षद बवंडर या ड्रामेबाजी करके विकास में किसी तरह की बाधा न डालें और एकजूट होकर लोगों के हित में कार्य करें। -सुरेश सैनी, प्रधान, सैनी सभा महेंद्रगढ़
- वर्जन: 1
कमेटी में चल रहे विवाद पर जल्द ही संज्ञान लिया जाएगा और बातचीत करके समाधान निकाला जाएगा। अगली बैठक जल्द और सुव्यवस्थित कराने का प्रयास किया जाएगा। विकास कार्यों के मामले में किसी प्रकार की ढील नहीं बरती जाएगी।-कंवर सिंह यादव, विधायक, महेंद्रगढ़
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- वर्जन: 2
बैठक चर्चा के लिए ही आयोजित की जाती है। हर पार्षद को सम्मान दिया जाता है और राय जानी जाती है लेकिन हर एजेंडे पर पार्षद एक साथ उग्र होकर हमला करते हैं। किसी पार्षद से एजेंडा नहीं मिलता है तो स्वयं ही एजेंडे बनाने की नौबत आ जाती है। - मेश सैनी, प्रधान, नगर पालिका
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- वर्जन: 3
प्रधान की ओर से पार्षदों से चर्चा की बजाय एजेंडे थोपे जा रहे हैं। प्रधान में अहम हावी हो रहा है और पार्षद व मैं सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। प्रधान की ओर से पार्षदों से एजेंडे बनाने से पहले चर्चा नहीं की जाती है और बैठक कर सीधे ही एजेंडे थोंप दिए जाते हैं। हाउस के हर सदस्य को पद के अनुसार अधिकार मिला है। यह अधिकार पार्षदों को नहीं दिया जा रहा है। -मंजू कौशिक, उप प्रधान, नगर पालिका
फोटो संख्या:52 सुरेश सैनी
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फोटो संख्या:52 सुरेश सैनी
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