कनीना। गांव चेलावास में हवेली के मलबे से चांदी के सिक्के मिलने की चर्चा दिनभर होती रही। वहीं वीरवार को भी ग्रामीण अनाज मंडी के नजदीक मलबे में चांदी के सिक्कों खोजते रहे लेकिन सिक्का नहीं मिला।
ग्रामीणों के अनुसार सेठ उमराव सिंह की यह हवेली एक सदी पुरानी है तथा नए निर्माण के लिए इसके एक हिस्से को तोड़ा गया था। ग्रामीणों का दावा है कि बुधवार को लोगों को मलबे से सौ से अधिक सिक्के मिले हैं। हालांकि इस मामले में पुलिस व प्रशासन को किसी भी प्रकार की शिकायत नहीं दी गई है। पुलिस ने सूचना के आधार मलबे वाले स्थान व प्राचीन हवेली की जांच भी की थी।
ग्रामीणों का कहना है कि एक सदी पूर्व सेठ उमराव सिंह व सीताराम द्वारा यह हवेली बनवाई गई थी। प्राचीन समय में लोग किसी भी आपात स्थिति होने पर धन की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए इसे सहेजकर रखते थे। पुराने भवनों में गुप्त रूप से दीवारों में आले छोड़कर धन रखकर उसे ढक दिया जाता था।
इस धन का पता परिवार के मुखिया को ही होता था। सेठ सीताराम व उमराव सिंह का संयुक्त परिवार इसमें रहता था। सेठों की गांव में किराना की दुकान थी। पांच दशकों के दौरान सेठों का परिवार अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर बस गया है। सेठ उमराव सिंह के चार पुत्र थे जिनमें गजानंद, सागरमल, ललित कुमार, नरेश थे। उनका लड़का ललित कुमार ने वर्ष 2024 में गांव में शिव मंदिर का निर्माण भी करवाया था।
वह विदेश में नौकरी करता है बाकी सभी की आसपास क्षेत्र में दुकानें हैं। वहीं दूसरे भाई सीताराम सेठ के लड़के राधेश्याम, गिरधारी लाल, विनोद कुमार ने अपना व्यापार कर रखा है। इस जगह को मान सिंह उर्फ बागड़ी गांव बाघड़ोली जिला झुंझुनू ने सेठ परिवार से खरीदी है। मानसिंह बचपन से ही गांव में रहता है उसकी बहन बीरमती भी इसी गांव में ब्याही है। यह परिवार भी खेती-बाड़ी का कार्य करता है।
गांव में दादा ठाकुर के मंदिर के पास बनी उमराव सिंह व सीताराम सेठ की हवेली जर्जर हो गई थी। मान सिंह द्वारा इसका एक हिस्सा तोड़ा गया था। जब मलबा बाहर फेंका गया तो उसमें चांदी के सिक्के मिले थे। गांव का कोई बड़ा प्राचीन इतिहास नहीं है लेकिन यह परिवार आर्थिक रूप से ठीक था। - ग्रामीण राहुल कुमार
सेठ उमराव सिंह व सेठ सीताराम का संयुक्त परिवार यहां पर रहता था। देखने की बात है कि उनके पास बहुत अधिक पैसे नहीं थे लेकिन प्राचीन समय में लोग धन को सहेजकर रखते थे तथा जरूरत के समय इसका प्रयोग करते थे। - रघुवीर सिंह सेहरावत, ग्रामीण
गांव में हवेली के मलबे से चांदी के सिक्के निकालने की खबर जैसे फैली तो चारों तरफ लोगों की भीड़ लग गई। जब बुधवार को कुछ स्कूली बच्चे छुट्टी के बाद घर आ रहे थे तो उन्हें सिक्के दिखाई दिए थे। मौके से ही सिक्के रखी गई प्राचीन थैली भी पाई गई थी। इन सिक्कों पर सन 1840 अंकित है। उस समय यही सिक्के प्रचलन में होंगे। - वेद प्रकाश, ग्रामीण
गांव में कई हवेलियां हैं जो हादसों को निमंत्रण दे रही हैं। ग्राम पंचायत को संज्ञान में लेते हुए इनके मालिकों को इन्हें तोड़ने के लिए आदेश दिए जाएं। हवेलियों में सिक्के मिलना कोई बड़ी बात नहीं है। क्षेत्र के अनेक स्थानों पर पुरानी हवेलियों को तोड़ते समय कुछ न कुछ प्राचीन चीजें मिलती हैं। - जयंत कुमार
- वर्जन:
गांव में चांदी के सिक्के मिलने की सूचना मिलने पर मौका मुआयना किया गया था लेकिन वहां पर चांदी के सिक्के पुलिस को नहीं मिले। यदि कोई शिकायत करता है तो कार्रवाई की जाएगी। - निरीक्षक संदीप, शहर थाना कनीना
फोटो संख्या:75- कनीना मंडी में मलबे से चांदी के सिक्के निकाते ग्रामीण--संवाद
फोटो संख्या:75- कनीना मंडी में मलबे से चांदी के सिक्के निकाते ग्रामीण--संवाद
फोटो संख्या:75- कनीना मंडी में मलबे से चांदी के सिक्के निकाते ग्रामीण--संवाद