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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल का गांव विकास में नहीं चमका

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पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व राज्यपाल सुरतीज सिंह बरनाला के गांव अटेली में आज भी बहुत सी जनसुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। 450 वर्ष पुराने इस गांव में 1925 में सुरजीत सिंह बरनाला ने जन्म लिया था। उस समय पंजाब एवं हरियाणा संयुक्त राज्य थे। पूर्व मुख्यमंत्री सुरजीत सिंह ने अटेली का नाम पूरे देश में चमकाया लेकिन आज तक यह गांव विकास कार्यों में नहीं चमक पाया।
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आज भी सड़क मार्गों की हालत जर्जर बनी हुई है। नारनौल रेवाड़ी सड़क मार्ग से गांव में जाने वाले अप्रोच सड़क मार्ग की खस्ता हालत होने के कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही साफ सफाई व्यवस्था भी पूर्ण रूप से चरमराई हुई है। गांव के बीच का मुख्य मार्ग आज भी पक्का होने को तरस रहा है। खस्ताहाल पंचायत भवन, पार्क की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है वहीं युवाओं के लिए खेल मैदान का भी यहां टोटा बना हुआ है। इस बार पंचायत चुनाव में यही मुख्य मुद्दे होंगे।
दो बार गांव में सर्वसम्मति से चुने जा चुके हैं सरपंच
कस्बे से 3 किलोमीटर पर स्थापित गांव अटेली भाईचारा कायम रखने में अपनी विशेष पहचान बनाए हुए हैं। आपसी भेदभाव व मनमुटाव के मामले अपने लेवल पर ही निपटने में सक्षम रहते हैं। 1982 में जब पंचायत गठन पंचों के माध्यम से होता था उस समय भाईचारे को बढ़ावा देते हुए रतिराम को निर्विरोध सरपंच मनोनीत किया गया। वहीं 2016 में फिर दूसरी बार इतिहास को दोहराया गया जहां पूर्व अध्यापक हरदुल सिंह को सरपंच सहित पूरी पंचायत को निर्विरोध बनाया गया। 8554 कनाल के क्षेत्रफल में फैले इस गांव की आबादी 2300 के करीब है। जिसमें करीब 500 घरों में 1760 मतदाता हैं।
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शिक्षित, ईमानदार व संघर्षशील व्यक्ति को गांव का प्रतिनिधि बनाया जाएगा जो भाईचारे को कायम रखते हुए विकास कार्यों को भी बढ़ावा दे सकें। आज के युग में राजनीतिक में भी पकड़ होना बहुत जरूरी है उसी के कारण गांव में विकास कार्य होते हैं।
-बने सिंह।
गांव की बागडोर ऐसे व्यक्ति के हाथ में दी जाएगी जो भेदभाव को समाप्त करके सर्व समाज के हित में कार्य करने में सक्षम हो। गांव में जन सुविधाएं उपलब्ध करवाएं। गांव में विकास कार्यों की जो कमियां हैं उनको पूरा करवाए। साथ ही भाईचारे को बरकरार रखने का काम करें।
- राजकुमार
कुछ दिनों बाद पंचायत के चुनाव होंगे। हम चुनाव में सक्षम, ईमानदार, कुशल नेतृत्व वाले उम्मीदवार को वोट देंगे। विकास की सोच रखने वाले तथा नशीले पदार्थों की तस्करी पर पूरी तरह अंकुश लगाने वाले उम्मीदवार को गांव की चौधरी सौंपेंगे।
-अजय कुमार।
गांव का प्रतिनिधि अगर जागरूक व ईमानदार है तो गांव में विकास भी तेजी से होता है इसलिए मतदाताओं को किसी लोभ लालच में ने आकर शिक्षित, ईमानदार व संघर्षशील व्यक्ति को ही वोट देना चाहिए।
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-राजेंद्र सिंह।
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