नारनौल। शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में विशेष महत्व दिया गया है। आचार्य मनीष निर्मल शास्त्री ने बताया कि इसे महारास पूर्णिमा और कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इसी रात भगवान श्रीकृष्ण ने वृंदावन में महारास रचाया था और समुद्र मंथन से मां लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। उन्होंने बताया कि इस रात चंद्रमा की किरणों में अमृत होने की मान्यता के चलते खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है। शरद पूर्णिमा से कार्तिक मास में दीपदान और आकाशदीप जलाने की शुरुआत भी होती है। मान्यता है कि पूरे महीने आकाशदीप जलाने से सुख-समृद्धि आती है। रविवार रात शहर के कई मंदिरों में खीर का प्रसाद वितरित किया जाएगा। संवाद