फोटो नंबर-02नारनौल में एक हलवाई की दुकान पर रखा गाजरपाक। संवाद
नारनौल। सर्दियों का मौसम आते ही नारनौल की गलियों में मिठास और मसालों की खुशबू फैलने लगती है। यहां का प्रसिद्ध गाजरपाक इस समय लोगों की पहली पसंद बना हुआ है। शहर का यह पारंपरिक स्वाद न केवल स्थानीय लोगों को लुभा रहा है बल्कि प्रदेश और देश के कई हिस्सों में इसकी मांग बढ़ गई है।
नारनौल की मिलनसार संस्कृति और खानपान की तहजीब भी इस स्वाद को और खास बनाती है। लोग यहां खाना बनाने के साथ-साथ खिलाने का भी विशेष शौक रखते हैं। नवंबर से मार्च तक चलने वाले गाजरपाक के सीजन में हलवाईयों की दुकानों पर काफी रौनक देखने को मिल रही है।
बाजार में सूरजा हलवाई, संतोष हलवाई, अशोक हलवाई और कापड़ी हलवाई जैसे प्रतिष्ठित नामों से बिकने वाला गाजरपाक ग्राहकों को आकर्षित कर रहा है। कई दुकानों पर इसे हल्की आंच पर गर्म रखा जाता है, जिससे इसकी ताजगी और स्वाद बरकरार रहता है। शहर की लगभग हर मिठाई की दुकान पर इन दिनों गाजरपाक की बिक्री हो रही है।
स्थानीय लोगों के अनुसार गाजर से गजरेला भी तैयार किया जाता है लेकिन गाजरपाक के स्वाद और बनावट की तुलना उससे नहीं की जा सकती। सर्दी में गर्मा-गर्म गाजरपाक खाने का अलग ही आनंद होता है। यहां से लोग दूर-दूर तक अपने रिश्तेदारों को भी यह मिठाई भिजवा रहे हैं। कई मंत्री और आला अधिकारी भी नियमित रूप से नारनौल से गाजरपाक मांग रहे हैं।
इस बार गाजरपाक 600 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है जो पिछले वर्ष 550 रुपये था। बढ़ती मांग और गुणवत्ता के चलते इसके दामों में वृद्धि हुई है। इसके बावजूद लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं है। नारनौल के गाजरपाक की मिठास अब देश के कई बड़े शहरों तक पहुंच चुकी है, जहां इसकी लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है।