महेंद्रगढ़। साल 1954 में बनी अनाज मंडी की प्राथमिक पाठशाला की इमारत को सिस्टम की बेरुखी ने खोखला बना दिया है। स्कूल की छतों और दीवारों से पलस्तर झड़ चुका है। पीपल की जड़े स्कूल की दीवारों और छताें को हिला चुकी हैं। एक तरफ से भवन की ईंटें भी गिरने लगी हैं। बस भवन गिरना बाकी रह गया है।
अनाज मंडी स्थित प्राथमिक पाठशाला के चार कमरे करीब 10 साल से जर्जर हाल में हैं। स्कूल में कई साल से एक ही अध्यापक हैं। बच्चों की पढ़ाई के अलावा कभी पीपीपी सर्वे, बीएलओ व बोर्ड परीक्षाओं में भी इनकी ड्यूटी लगा दी जाती है। जब अध्यापक अवकाश पर होते हैं तो पाठशाला बंद करनी पड़ती है।
एक किलोमीटर के दायरे में कोई अन्य सरकारी स्कूल नहीं है, इस वजह से यहां पढ़ने वाले बच्चे किसी अन्य स्कूल में मर्ज भी नहीं हो पा रहे हैं।
स्कूल के चार कमरों का यह हाल है
स्कूल के चार कमरों में से एक में मिड डे मील की रसोई चल रही है। दूसरे कमरे में कार्यालय है और तीसरे कमरे में 10 साल पहले टूटी कुर्सियां और पुराना कबाड़ रखा हुआ है। पांचवीं तक के 34 विद्यार्थियों को एक की कमरे में फर्श पर बैठाकर पढ़ाई कराई जाती है।
स्कूल का रिपोर्ट कार्ड
विद्यार्थियों की संख्या- 34
स्वीकृत शिक्षकों के पद - 5
रिक्त पदों की संख्या - 3
कमरों की संख्या - 4
इस्तेमाल लायक-0
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वर्जन-
-पिछले 16 माह में शिक्षक, सफाई कर्मी और चौकीदार की तीन बार मांग की जा चुकी है। लेकिन, अभी तक विभाग ने किसी को उपलब्ध नहीं कराया है। भवन की मरम्मत के लिए भी खुद व्यवस्था करनी पड़ रही है। साथ ही पीपीपी सर्वे, बीएलओ सहित अन्य प्रकार की ड्यूटी लगा दी जाती है। सुविधाओं के अभाव में एक साथ सभी बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है।
-जोगेंद्र सिंह, मुख्याध्यापक राप्रापा अनाज मंडी महेंद्रगढ़।
...........-शिक्षा विभाग से 3 साल पूर्व इस भवन की दशा सुधारने की मांग की गई थी। साथ ही पर्याप्त स्टाफ की तैनाती व सुविधाओं का दायरा बढ़ाने की मांग उठाई गई लेकिन विभाग ने सुध ही नहीं ली। यहां बच्चों के बैठने तक की सुविधा नहीं है। कैसी शिक्षा दी जा रही है इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
-बिजेंद्र सिंह यादव, अनाज मंडी प्रधान महेंद्रगढ़।