फोटो नंबर- 14ओमप्रकाश, मोहल्ला- रामकरण दास चौक, नारनौल।
नारनौल। होली के त्योहार को मनाने के तरीके में समय के साथ बहुत बदलाव आया है। क्षेत्र के बुजुर्गों ने बताया कि पहले होली की तैयारी 15 दिन पहले शुरू हो जाती थी। संयुक्त परिवार के अंतर्गत महिलाएं समूह में होली का पूजन करती थी। सभी की उपस्थिति में रात के समय होलिका दहन किया जाता था। रंग खेलते समय शालीनता रखी जाती थी जो प्रेम व भाईचारे का प्रतिक थी।
बदलते दौर में फीकी पड़ती होली
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जब मेरी शादी हुई थी उस समय महिलाओं में गोबर से तैयार किए जाने वाले बिड़कले सबसे ज्यादा बनाने की होड़ रहती थी। वहीं शाम के समय परिवार की सभी महिलाएं मिलकर पकवान तैयार करती थीं और परिवार के सभी सदस्यों का खाना एक ही चूल्हे पर बनता था लेकिन समय के साथ अब त्योहार भी एकल परिवारों में सिमट गए हैं। इस कारण होली का त्योहार अधूरा सा लगता है।
-मूर्ति देवी, मोहल्ला पीरआगा, नारनौल
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पुराने समय में संसाधनों की कमी थी लेकिन भाईचारे और आपसी प्रेम के साथ त्योहार मनाए जाते थे। रंग खेलते समय युवा खूब मौज-मस्ती करते थे लेकिन बुजुर्गों के प्रति आदर व अनुशासन बना रहता था। आधुनिक समय में होली के रंग विभिन्न प्रकार के हो गए हैं लेकिन पारंपरिक मूल्य पीछे छूट गए हैं। इस कारण रंग खेलते हुए कई दुर्घटनाएं और लड़ाई झगड़े देखने को मिलते हैं।
-ओमप्रकाश, मोहल्ला रामकरण दास चौक, नारनौल