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तप से निखरती है आत्मा, धर्मसभा में दिया आत्मशुद्धि का संदेश : मुनिश्री

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फोटो नंबर-05जैन समाज द्वारा आयोजित श्री लोक कल्याण महामंडल विधान में भाग लेते समाज के लोग। स्
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नारनौल। मोहल्ला नलापुर स्थित 1008 श्री शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर परिसर में मुनिश्री महंत सागर, मुनिश्री विभोर सागर एवं मुनिश्री सानंद सागर महाराज के सानिध्य में श्री लोक कल्याण महामंडल विधान चल रहा है। पंडित ऋषभ जैन शास्त्री के निर्देशन में आयोजित विधान में शनिवार को सातवीं शक्ति तप भावना का महत्व बताया गया।
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मुनिश्री ने कहा कि तप व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार साधना करने की प्रेरणा देता है। तप आत्मशुद्धि का माध्यम है और साधक को मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ाता है। उन्होंने तप के बाहरी और आंतरिक स्वरूप की जानकारी देते हुए आत्मा को पहचानने का संदेश दिया।
मुनिश्री महंत सागर महाराज ने कहा कि धन कमाना गलत नहीं है, लेकिन उसका सही उपयोग जरूरी है। कमाई का कुछ हिस्सा दान, मंदिर निर्माण, साधु सेवा और तीर्थ वंदना जैसे धार्मिक कार्यों में लगाना चाहिए। उन्होंने नियमित दिनचर्या और रोज भगवान की आराधना करने की अपील की।
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मुनिश्री विभोर सागर महाराज ने चातुर्मास को आत्मचिंतन, स्वाध्याय और संयम का अवसर बताया। वहीं मुनिश्री सानंद सागर महाराज ने कहा कि तन को साधना और मन को नियंत्रित करना ही सच्चा तप है। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।
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