नारनौल/नांगल चौधरी। हे भगवान किसानों के अरमानों पर पानी मत फेरो, हमारी पूरे साल की खून पसीने की मेहनत बर्बाद हो रही है। जी हां आजकल बरसात व ओलों की मार झेल रहे किसानों की जुबां से बस यहीं दुआ निकल रही हैं, कि भगवान बस करो। वीरवार रात को बूंदाबांदी के बाद शुक्रवार अल सुबह से ही बारिश शुरू हो गई जो सुबह 7 बजे तक जारी रही। इसके बाद शीतलहर चलने से कपकपाने वाली सर्दी रही। शुक्रवार दोपहर बाद तीन बजे फिर जोरदार बारिश हुई जो देर सायं तक जारी रही। नारनौल में शुक्रवार को 40 एमएम बारिश दर्ज की गई। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में शहर की बजाय ज्यादा बारिश हुई है।
किसानों की फसल पानी में डूबी
जिले में जोरदार बारिश होने से खेतों में कटी गेहूं की फसल डूब गई। वहीं खलिहानों में लगी सरसों की फसल भी पानी में डूब गई। बारिश किसानों पर आफत बनकर बरस रही है। पहले पाला फिर ओलावृष्टि और अब तेज बारिश ने किसानों के अरमानों पर पूरी तरह पानी फेर दिया है। किसानों के पास अब बर्बादी के सिवाय कुछ नहीं बचा है। अगर सरकार ने किसानों का साथ नहीं दिया तो किसान बर्बाद हो जायेगा। पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति रबी फसल पर ही आधारित होती हैं। जबकि पाले से नष्ट हुई फसल का मुआवजा तो अभी तक मिला नहीं है, वहीं बरसात और ओलों ने अपना कहर बरपा रखा हैं। लगातार हो रही बरसात से कटाई हुई सरसों की फसल गलने लगी हैं। वहीं गेंहू की फसलें खेतों में बिछ गई है। जिससे न तो गेहूं की कटाई हो रही हैं और न ही कटाई हुई सरसों निकलवाई जा रही हैं। बल्कि खेतों में रखी कटाई हुई सरसों में बरसात के चलते नमी बढने लगी हैं।
जिले में 90110 हेक्टेयर में सरसों व 32340 हेक्टेयर में गेहूं की फसल
जिले में इस वर्ष रबी की अच्छी फसल थी। जिससे किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद थी। इस बार 90110 हेक्टेयर में सरसों, 32340 हेक्टेयर में गेहूं, चना 4220 व जौ 230 हेक्टयर भूमि पर रबी की फसल बोई गई थी। वहीं डार्क जोन नांगल चौधरी में 14500 हेक्टेयर भूमि पर सरसों की फसल, 4750 हेक्टेयर भूमि पर गेंहू की फसल, 2850 हेक्टेयर भूमि पर चने की फसल और 50 हेक्टेयर भूमि पर जौ की फसल की पैदावार की गई है। जनवरी माह में कड़ाके की ठंड के की वजह से पड़े पाले से सरसों की फस्ल में 30 प्रतिशत से लेकर के 90 प्रतिशत तक नुकसान हो गया था। जिस खेत में सरसों की फसल में 90 प्रतिशत से अधिक नुकसान हुआ था वहां किसान ने खड़ी फसल पर ही ट्रैक्टर चलवा दिए थे। जबकि जहां कम नुकसान हुआ था, उन किसानों ने सरसों की कटाई करवा खेतों में ढ़ेर इक्कठे कर लिए थे। ताकि खाता बनाकर सरसों निकाली जा सके। लेकिन किसानों के अरमानों पर तब पानी फिर गया जब जोरदार बरसात व ओलावृष्टि हो गई। जिसके चलते खेतों में रखी सरसों की फसल पूरी तरह से भीग गई और गेहूं की फसल खेतों में बिछ गई। जिसके बाद मौसम साफ होने के बाद जब फसल को सुखया गया तो सूखने के बाद जैसे ही किसानों ने फसल निकालने की तैयारी की तो फिर से बरसात हो गई। जिससे सरसों फिर से भींग गई। अब ऐसे में लगातार भीगने से सरसों की फसल गलने की कगार पर आ गई हैं। साथ ही सरसों के दाने की क्वालिटी भी खराब होने का डर्ा हो गया हैं। वहीं गेंहू की फसले खेतों में तिरछी बिछ जाने से कटाई कार्य करना मुश्किल हो गया हैं। अब ऐसे में किसानों के सामने फसलें निकालना बहुत ही मुश्किल हो गया हैं। जबकि मंडिया शुरू हो गई है। लेकिन आवक नहीं होने के कारण खरीद कार्य न के बराबर हो रहा हैं।
सरकार पर टिकी किसानों की आस
जिले में ओलावृष्टि व बारिश से खराब हुई फसलों की सरकार ने स्पेशल गिरदावरी शुरू कर दी है। वहीं बीमित किसानों ने कृषि कार्यालय में खराबे के आवेदनजमा करवा दिये है। किसान सुरेश कुमार, अजीत सिंह, रोहताश, रामकिशन आदि ने बताया कि जिले में सही तरीके से गिरदावरी नहीं हो रही है। बारिश से पूरे जिले की फसलें खराब हुई है। सरकार सभी किसानों को बिना गिरदावरी किए फसलों का मुआवजा दें। सरकार किसानों के साथ मुआवजे में भेदभाव की नीति न बनाये। क्योंकि बारिश से पूरे जिले की फसलें खराब हुई है। इसलिए सरकार बिना देरी किए किसानों के खाते में मुआवजे की राशि भेजनी शुरू करें।