। महेंद्रगढ़ में अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट स्थापित किए जाने की प्रक्रिया पर फिलहाल ब्रेक लग गया है। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश एक पत्र जारी किया है। जिसमें कहा कि महेंद्रगढ़ में एडीजे कोर्ट का प्रस्ताव प्रदेश सरकार का था। हाई कोर्ट की ओर से ऐसा कोई विचार नहीं है। जो पत्राचार चला वह सरकार की ओर से ही था।
महेंद्रगढ़ जिला मुख्यालय संघर्ष समिति के अध्यक्ष किरोड़ीलाल यादव ने कहा कि हाई कोर्ट की ओर से ऐसा पत्र जारी होना हमें धक्का पहुंचाने वाला है। यह हमारे साथ धोखा है। जनता को सुलभ न्याय दिलाने की प्रक्रिया को बाधा पहुंचाने वाला है। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो एडीजे कोर्ट स्थापित करा सकती है। इस बारे में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से बातचीत कर निर्णय लिया जाएगा। अगर इसके लिए अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा तो उसमें भी पीछे नहीं हटेंगे।
पूर्व प्रधान बंसीलाल यादव ने कहा कि हमारी मुख्य मांग जिला मुख्यालय की है। एडीजे कोर्ट की स्थापना हो तो बेहतर है। उन्होंने कहा कि उप प्रधान धर्मबीर, सचिव संदीप शर्मा, सहसचिव सुबोध शर्मा धरने के समर्थन में हैं। बहुमत के हिसाब से बार के कुल पांच पदाधिकारियों में तीन पदाधिकारी हमारे साथ हैं। प्रधान अजीत यादव ने बिना सलाह किए किसी के दवाब में आकर धरना समाप्त करने का फैसला लिया। जो पूरी तरह से गलत है। बार के सदस्य उससे सहमत नहीं हैं। एडवोकेट जिम्मी चौधरी ने कहा कि 2019 में भी जिला मुख्यालय के लिए बार ने धरना चलाया था। उस समय सीएम मनोहरलाल ने दोबारा से सरकार बनने के बाद महेंद्रगढ़ को जिला बनाने का भरोसा दिलाया था। कुल 234 बार सदस्यों में से 128 ने हस्ताक्षर कर हमारे साथ होने का एलान किया है। जिला मुख्यालय के धरने को समाप्त करने के बारे में गलत धारणा फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। जिला मुख्यालय के संघर्ष को जारी रखेंगे।
सहसचिव सुबोध शर्मा ने कहा कि बार प्रधान अजीत यादव ने अपना फैसला बार तथा जनता पर अपना फैसला थौंपने का काम किया है। बार के कुल सदस्यों में से 50 प्रतिशत लोगों ने अपना नाम, मोबाइल नंबर, हस्ताक्षर कर हमारा समर्थन किया है।
यह था मामला
4 फरवरी 2021 को प्रदेश सरकार की ओर से पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार को एक पत्र भेजा गया था। जिसमें महेंद्रगढ़ में एडीजे कोर्ट स्थापित करने के बारे में हाई कोर्ट से अनुरोध किया गया था। जिसके बाद वकीलों को महेंद्रगढ़ में एडीजे कोर्ट स्थापित होने की उम्मीद जगी थी।