नारनौल। शहर के नांगल चौधरी रोड पर बड़े भूभाग पर स्थित ऐतिहासिक जल महल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा। इसकी मरम्मत और सौंदर्यीकरण का काम जारी है। पर्यटन को बढ़ावा मिलने से यहां रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
जल महल ऐतिहासिक धरोहर में शुमार है। जल महल का निर्माण अकबर के शासन काल में सन 1590 से 1591 ईसवी में हुआ था। नवाब शाह कुली खान ने इसका निर्माण करवाया था। वह 52 वर्षों तक नारनौल के गवर्नर रहे थे। पुरातत्व विभाग ने जल महल को संरक्षित भी कर रखा है। अब इसे जल्द ही पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा। जल महल के पूर्व दिशा में स्थित छोटे तालाब के साथ लगती दीवार का निर्माण पूरा हो चुका है। कुछ मरम्मत का काम अभी बाकी है। इसके बाद आगामी तीन से चार माह में जल महल के अंदर पानी भरने का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही पर्यटकों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए बैठने के लिए नई सीटें और वाटर कूलर लगेगा।
वर्षा जल संग्रह को ध्यान में रखकर हुआ था निर्माण
जल महल उस समय की विस्तृत जल संचयन परिसर की अनेक संरचनाओं में से एक था। इसका निर्माण करते समय बारिश की जल निकासी संग्रह और संचयन के लिए प्राकृतिक ढलान का उपयोग किया था। इसके ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए चार अगस्त 1961 को राष्ट्रीय महत्व के स्मारक के रूप में संरक्षित किया गया।
सुरक्षा मानक के अनुसार रहेगा पानी का लेवल
पिछली बार जब जल महल में पानी भरा गया था तो कुछ हादसे भी हुए थे। जल महल इमारत को भी नुकसान पहुंचा था, लेकिन इस बार जल महल में पानी भरते समय इस बात का विशेष ध्यान रखा जाएगा कि पानी का लेवल इतना रहे, जिससे न इमारत को नुकसान न पहुंचे। साथ ही अगर कोई व्यक्ति हादसे का शिकार हो तो उसे बचाया जा सके।
छोटे तालाब की दीवार का निर्माण कार्य पूरा हो गया है। अब इसे जल्द ही पानी से भरा जाएगा। इस बार सुरक्षा को ध्यान में रखकर वाटर लेवल रखा जाएगा।
-अमित कुमार, सरंक्षण सहायक, भारतीय पुरातत्व विभाग।