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Mahendragarh-Narnaul News: सबसे भारी अहंकार जिसका भार पृथ्वी भी नहीं झेलती

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नारनौल। जीवन क्या है, इसे कैसे जीना है और जीवन में अवसादों से कैसे मुक्त हो इन सब बातों को समझने के लिए जरूरी है भागवत गीता। यह बात शुक्रवार रात शहर के रेवाड़ी रोड स्थित एक निजी मेरिज पैलेस में श्री कृष्ण जीओ गीता परिवार की ओर से आयोजित एक दिवसीय सत्संग कार्यक्रम में महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने अपने प्रवचनों के माध्यम से कही। सर्वप्रथम आचार्य क्रांति निर्मल व पंडित देवकीनंदन ने समाजसेवी व धार्मिक संस्थाओं के लोगों से गीताजी का पूजन करवा दीप प्रज्ज्वलित करके कार्यक्रम शुभारंभ करवाया। इसके बाद गीता के ज्ञान रूपी सागर में डुबकी लगवाते हुए गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज ने चैत्र नवरात्र व चैत्र मास शुक्ल पक्ष एकादशी के बारे में विस्तार से महत्व बताया। कहा कि इस बार रामनवमी हम सभी के लिए विशेष रही क्योंकि अनेक वर्षों की तपस्या के बाद अब अवध में भगवान राम विराजे हैं। स्वामीजी ने लोगों को गीत के सात सूत्र बताए और गीता को जीवन सबसे उपयोगी बताया। कहा कि भगवान ने अर्जुन के माध्यम से आमजन को गीता में संदेश दिया है। स्वामी जी ने कहा कि इस संसार में अहंकार ही सबसे भारी वस्तु है, जिसका भार पृथ्वी भी नहीं झेल सकती। रावण व कंस को अहंकार हुआ तो इसका भार तारने के लिए भगवान को अवतार लेना पड़ा। जीवन को हमेशा यह सोचकर जीना सीखो कि मैं करने वाला कोई नहीं जो हो रहा है वह सब उसकी मर्जी से हो रहा है। जीवन में सुख-दुख सबका सामना करो, लेकिन गीता को मत छोड़ो अगर आपने ऐसा कर लिया तो आपका जीवन ही बदल जाएगा। स्वामी जी ने कहा कि प्यार और सम्मान पाना चाहते हो तो इसे बांटना सीख लो।
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