कनीना। 68 वर्षों से नगर पालिका चुनाव में पार्षद ही प्रधान चुनते आए हैं। इस बार सरकार ने मतदाताओं के हाथ में कमान सौंप दी है। इस बार मतदाता प्रधान का चुनाव करेंगे।
दो दिन पहले चंड़ीगढ़ में हुई प्रधान पद के लिए ड्रॉ में कनीना नगर पालिका प्रधान के लिए महिला पद का नाम सामने आया है। पिछले वर्ष कनीना में 13 वार्डों में चुनाव करवाएं गए थे। इस बार एक वार्ड ओर बढ़ाकर 14 वार्ड बनाया गया है। 14 वार्डों में करीब 10409 मतदाता अपने मत का प्रयोग करेंगे। नगर पालिका कनीना के चुनावों के लिए अब की बार महिला प्रधान बनेगी। नगर पालिका में 8 बार प्रधान का राज और चार बार प्रशासक को जिम्मेदारी रही। 68 वर्षों में दो बार महिला भी नगर पालिका प्रधान की कमान संभाल चुकी है।
बता दें कि वर्ष 1955 में नगर पालिका कनीना बनी थी। इसमें पहली बार चौधरी बलबीर सिंह प्रधान चुने गए थे। इसके बाद 1962 में चौधरी जानकी प्रसाद, वर्ष 1964 में संतोष कुमार, 1968 में दोबारा से चौधरी बलबीर सिंह, 1987 में राजेंद्र सिंह लोढ़ा, 1991 में बीडीपीओ सोहनलाल को प्रशासक के रूप में चार्ज सौंपा गया था। 1991 में ही चौधरी दिलीप सिंह प्रधान बने, वर्ष 1994 में वीसी राजशेखर को प्रशासक के जिम्मेदारी मिली।
वर्ष 1994 में ही बीडीपीओ मुन्नीलाल नगर पालिका प्रशासक रहे। वर्ष 1995 में राजेंद्र सिंह लोढ़ा दोबारा से प्रधान बने, वर्ष 2006 में प्रशासक महेंद्र सिंह मोरवाल रहे, वर्ष 2007 में संतोष देवी प्रधान बनी, वर्ष 2012 में शारदा देवी प्रधान रही, वर्ष 2017 में एचसीएस संदीप सिंह प्रशासक के रूप में रहे, वर्ष 2018 में आईएएस अभिषेक मीणा प्रशासक के रूप में रहे। वर्ष 2019 में सतीश जैलदार प्रधान रहे, वर्ष 2023 में प्रशासक के रूप में एसडीएम सुरेंद्र सिंह को जिम्मेवारी सौंपी गई, उसके बाद एसडीएम अमित कुमार और वर्तमान में एसडीएम डॉ. जितेंद्र सिंह प्रशासक के रूप में कार्य कर रहे है।
-
सात प्रधान पांच वर्ष कार्यकाल पूरा कर चुके
नगर पालिका चुनाव में सात प्रधान अपने पांच वर्ष कार्यकाल पूरा कर चुके है। दो प्रधान तीन वर्ष का कार्यकाल तथा एक प्रधान का दो वर्ष का कार्यकाल ही रहा है। 1955 में पहली बार प्रधान बने बलबीर सिंह का तीन वर्ष का कार्यकाल रहा। चौधरी जानकी प्रसाद का दो वर्ष का तथा संतोष का तीन वर्ष का कार्य रहा। चौधरी बलबीर सिंह 1955 तथा 1968 में चुनाव जीता था। वहीं राजेंद्र सिंह लोढ़ा ने 1987 तथा 1995 में प्रधान पद रहे थे। इसके अलावा नगर पालिका प्रशासक के रूप में रहे एसडीएम संदीप को छोड़कर अन्य अधिकारियों का कार्यकाल अच्छा नहीं रहा। किसी अधिकारी का दो से तीन माह तो किसी का 10 से 11 माह रहा है। एसडीएम संदीप का करीब 20 माह तक कार्यकाल रहा था।