फोटो नंबर-02अनाज मंडी की रामलीला में ताड़का वध की लीला का मंचन करते कलाकार। संवाद
नारनौल। राजा दशरथ का दरबार उदास था। संतान न होने की पीड़ा महाराज के चेहरे पर साफ झलक रही थी। तभी गुरु के आदेश पर पुत्रेष्टि यज्ञ शुरू हुआ। यज्ञ की अग्नि से अग्निदेव प्रकट हुए और हाथों में खीर का पात्र सौंपकर बोले...राजन, आपकी मनोकामना पूर्ण होगी। कुछ ही समय बाद अयोध्या के महलों में किलकारियां गूंज उठीं।
रामायण का यह दृश्य कहीं और नहीं, नारनौल की पुरानी अनाज मंडी स्थित श्रीकृष्णा ड्रामेटिक क्लब के रंगमंच पर जीवंत हुआ। भगवान नारायण सेवा संस्था की ओर से आयोजित रामलीला के दूसरे दिन वीरवार रात श्रीराम जन्म, विराट रूप और ताड़का वध की लीलाओं का मंचन हुआ। जन्मोत्सव का दृश्य देख दर्शक भावुक हो उठे और पूरा पंडाल जयकारों से गूंज गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ समाजसेवी नरेश कुमार रोहतकिया ने मां सरस्वती के सामने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच संचालन रतनलाल भास्कर ने किया।
रामलीला संरक्षक प्रेम गुलाठी ने बताया कि चारों राजकुमारों के जन्म पर अयोध्या में बधाइयां बांटी गईं और श्रद्धालु खुशी से झूम उठे। इसके बाद विश्वामित्र के साथ श्रीराम और लक्ष्मण के वन जाने तथा ताड़का वध की लीला का मंचन किया गया।
कलाकारों ने अपने अभिनय से सबका दिल जीता। श्रीराम की भूमिका में ध्रुव वर्मा, लक्ष्मण में कनिष्क कोहली, दशरथ में विष्णु डहनवाल, विश्वामित्र में भारत भूषण तायल और ताड़का के रूप में वेद प्रकाश सैनी ने सुंदर प्रस्तुति दी। भगवान विष्णु का अभिनय रामकिशोर अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर दयानंद सैनी, विजय जैन, वासुदेव सिंघल सहित संस्था के सदस्य और बड़ी संख्या में दर्शक मौजूद रहे।