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Mahendragarh-Narnaul News: बाबा जयरामदास धाम की आस्था दे रही युवाओं के खेलों को पहचान

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फोटो संख्या:51 गांव पाली ​स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद
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महेंद्रगढ़। गांव पाली में स्थित परमहंस बाबा जयरामदास मंदिर आज देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का बड़ा केंद्र बन चुका है। यहां हरियाणा ही नहीं, बल्कि दक्षिण और पूर्वी भारत से भी बड़ी संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने पर बाबा के दरबार में प्रसाद चढ़ाकर आशीर्वाद लेते हैं।
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ग्रामीणों ने बताया कि बाबा जयरामदास महाराज का जन्म वर्ष 1862 में गांव पाली में हुआ था। बचपन से ही उनका मन भगवान की भक्ति में लगा रहता था। जब बाबा सात वर्ष के थे, तब इलाके में भयंकर अकाल पड़ा। खेती के दौरान उनका एक बैल मर गया। ऐसे समय में बाबा खुद बैल के साथ खेत में जुताई और बीजाई करने लगे।
एक दिन उनके पिता ने उन्हें फसल की रखवाली के लिए खेत में बैठाया लेकिन बाबा भगवान के ध्यान में इतने खो गए कि पास आई गाय फसल खा गई। इससे नाराज होकर पिता ने उनकी पिटाई की। इसके बाद बाबा अपने मामा के गांव रणकोली (चरखी दादरी) चले गए। वहीं उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान की प्राप्ति हुई।
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बाद में बाबा पाली लौट आए और गांव में जाल के पेड़ के नीचे कुटिया बनाकर रहने लगे। उन्होंने लोगों के दुख दूर किए और कई चमत्कार दिखाए। धीरे-धीरे लोगों की श्रद्धा बढ़ती गई और बाबा की पूजा शुरू हो गई।
वर्ष 1942 में बाबा ने समाधि ली। तभी से हर साल माघ एकादशी पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है। मेले में खेलकूद प्रतियोगिताएं भी कराई जाती हैं। बाबा जयरामदास क्रिकेट स्टेडियम में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी भी हिस्सा लेते हैं।
साल 2022 में मंदिर का करीब साढ़े छह करोड़ रुपये की लागत से भव्य निर्माण कराया गया। धौलपुर के सफेद पत्थरों पर की गई सुंदर नक्काशी श्रद्धालुओं को खास आकर्षित करती है।
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ग्रामीण बोले-हमारी गहरी आस्था, बाबा करते हैं चमत्कार
लाखाें लोग यहां पर कामना पूरी होने पर दान देकर गए हैं। इसी से तीन धर्मशाला और बाबा का भवन बना है। हर रोज पक्षियों को 35 किलो अनाज डाला जाता है। फिलहाल 6.50 करोड़ रुपये से नया भवन बनाया गया है और भक्तों के लिए टीन शेड लगाया जाएगा। -भंवर सिंह, प्रधान, मंदिर कमेटी
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बाबा के पास एक कुतिया रहती थी और बच्चों को जन्म देने के बाद उसकी मौत हो गई थी। तभी बाबा ने उसको लात मारी और उठने के लिए कहा तो वह जीवित हो गई। ऐसा हमारे पूर्वज बताते थे और अब भी युवा नौकरी की कामना करके जाते हैं और सफल हो रहे हैं। -कंवर सिंह, ग्रामीण
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बाबा पर आने वाले चढ़ावे से युवाओं के लिए वॉलीबाल, कबड्डी, कुश्ती, क्रिकेट, एथलेटिक्स का मैदान तैयार किया है। यहां पर खिलाड़ी तैयारी करते हैं और सेना में भर्ती हो जाते हैं। भक्तों के रुकने के लिए धर्मशाला बनाई गई हैं। माघ की एकादशी पर लगने वाले विशाल मेले में लाखों की भीड़ उमड़ती है।-प्रदीप कुमार, सचिव, मंदिर कमेटी

मंदिर में 200 साल से अधिक पुराना पीपल का पेड़ है। इसमें लोगों की आस्था है और लोग पूजा करते हैं। बाबा लोगों को आशीर्वाद के तौर पर गाली देते और लात मार देते थे। लोग आशीर्वाद समझकर खुश होते और उनके काम भी बन जाते थे।-उत्तम सिंह, ग्रामीण

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

फोटो संख्या:51 गांव पाली स्थित बाबा जयरामदास मंदिर। संवाद

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