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Mahendragarh-Narnaul News: माैत की पटरी...24 घंटे में तीसरी माैत, अब महिला की गई जान

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-फोटो 51 : रागिनी। फाइल फोटो
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बहादुरगढ़। छोटूराम नगर से होकर गुजरने वाली रेलवे लाइन मौत की पटरी बनती जा रही है। 24 घंटे के भीतर ट्रेन की चपेट में आने से तीन लोगों की मौत हो गई। शुक्रवार को रागिनी देवी (44) की जान गई। एक दिन पूर्व मोबाइल पर रील बना रहे दो युवकों की दिल्ली-रोहतक पैसेंजर ट्रेन की चपेट में आने से जान चली गई थी।
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मूलरूप से बिहार के मोतीहारी जिले के गांव जयतापरलुर लवकुरिया की रहने रागिनी देवी आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र पार्ट-बी में स्थित एक जूता फैक्टरी में सिलाई का काम करती थीं। वह तीन बेटियों की मां थीं और परिवार के साथ बहादुरगढ़ के छोटूराम नगर में रह रही थीं।

परिजनों ने बताया कि बेटियों को स्कूल भेजने के बाद वह रोजाना की तरह शुक्रवार सुबह करीब 9 बजे ड्यूटी के लिए घर से निकली थीं। छोटूराम नगर के पास रेलवे लाइन के साथ-साथ चल रही थीं। इसी बीच ट्रेन की चपेट में आ गईं। रागिनी के सिर पर गंभीर चोट लगी और मौके पर ही मौत हो गई।
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रागिनी के पति अंजनी प्रसाद एक अन्य फैक्टरी में काम करते हैं। उन्होंने बताया कि वह सुबह थोड़ी देर पहले ही ड्यूटी के लिए निकले थे। कुछ देर बाद सूचना मिली कि रागिनी ट्रेन की चपेट में आ गई है।
बहादुरगढ़ में रेल हादसों में इस साल 61 की मौत, औसतन सप्ताह में एक
बहादुरगढ़। इस साल बहादुरगढ़ में 61 लोग ट्रेन की चपेट में आने से जान गंवा चुके हैं। छोटे से शहर बहादुरगढ़ में यह आंकड़ा डराने वाला है। साल का हिसाब करें तो औसतन हर सप्ताह एक जान ट्रेन हादसे में जा रही है। हालांकि जीआरपी दावा करती है कि वह हादसे रोकने के लिए तमाम जागरूकता के प्रयास करती है लेकिन ट्रेन हादसों में मरने वालों की तादात कम नहीं हो रही है। खास बात यह है कि अकेले छोटूराम नगर रेलवे फाटक के पास 17 लोग मौत का शिकार हुए हैं। इस फाटक से दिनभर में हजारों की संख्या में लोगों का आवामन होता है।
जीआरपी के रिकॉर्ड के मुताबिक, सबसे ज्यादा दुर्घटनाएं छोटूराम नगर में रेलवे फाटक के पास होती हैं। वजह, इस फाटक के एक तरफ 50 हजार से अधिक प्रवासी लोगों की बस्ती है। दूसरी तरफ आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र बसा हुआ है। यहां ढाई हजार से अधिक छोटी-बड़ी औद्योगिक इकाइयां हैं। इन इकाइयों में काम करने वाले श्रमिक छोटूराम नगर में ही निवास करते हैं। लोग फैक्टरियों मे आने-जाने के लिए इस फाटक का इस्तेमाल करते हैं।
आबादी वाले इलाके में दीवार बनाने की मांग
छोटूराम नगर के सतेंद्र मिश्रा, कृष्णा, संतोष ने कहा है कि छोटूराम नगर रेलवे फाटक के पास आए दिन रेल हादसे होते रहते हैं। सरकार को यहां दीवार बनानी चाहिए। ताकि लोग रेलवे ट्रैक पर न चलें और हादसे का शिकार होने से बच जाएं।
वर्जन-
-लोगों को रेलवे ट्रैक पर न चलने के लिए लगातार जागरूक किया जाता है। सबसे ज्यादा अभियान भी छोटूराम नगर क्षेत्र में चलाया जाता है। हालांकि, यहां से प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग रोजी-रोटी कमाने के लिए ट्रैक पार करते हैं और लापरवाही के कारण हादसों का शिकार हो जाते हैं।
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-उर्मिला देवी, एएसआई, जीआरपी, बहादुरगढ़।
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