नारनौल। 2020 में मारपीट के मामले में अदालत ने पांच दोषियों को तीन साल की सजा सुनाई गई इस फैसले के खिलाफ सेशन कोर्ट में दोषियों ने एक अपील दायर की थी जिस पर सुनवाई करते हुए सेशन जज नरेंद्र सूरा ने सजा को बरकरार रखते हुए पांचों दोषियों होशियार सिंह, कौशल्या, सतीश कुमार, संजय सिंह और सतबीर को निगरानी में पर छह माह के लिए रिहा करने का फैसला सुनाया है।
जानकारी के अनुसार बिमला देवी अपनी बहुओं मीना और सोमलता के साथ 16 फरवरी 2015 सुबह लगभग नौ बजे चारा लाने खेत में गई थीं। वहां पुराने झगड़े की रंजिश के कारण पांचों आरोपियों ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों के पास हॉकी, लोहे का पाइप और डंडे थे। हमले में बिमला देवी उनके बेटे मुकेश और बहुओं को सिर में गंभीर चोटें और फ्रैक्चर हो गया था।
इसके बाद पांचों ने साल 2020 में अपने वकील के माध्यम से सेशन कोर्ट में निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सजा में बदलाव किए जाने की अपील दायर की थी। सुनवाई के दौरान वकील ने दलील दी कि ये लोग पेशेवर अपराधी नहीं हैं और पिछले 10 वर्षों से मुकदमे का सामना कर रहे हैं।
अदालत ने अपराधी परिवीक्षा अधिनियम 1958 का हवाला देते हुए माना कि इन्हें जेल भेजने के बजाय सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए। अदालत ने आदेश दिया कि उन्हें जेल भेजने के बजाय छह महीने की निगरानी पर रिहा किया जाए। साथ ही प्रत्येक को 50,000 का निजी मुचलका और इतनी ही राशि की जमानत भरने के आदेश दिए। इसके अलावा कोर्ट ने उन्हें छह महीने तक शांति बनाए रखने और अच्छा व्यवहार करने की सख्त हिदायत दी है।