केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री द्वारा चार वर्ष पहले की गई कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा पर कोई काम नहीं हुआ। जिला प्रशासन, प्रदेश एवं केंद्र सरकार के प्रति इस संबंध में कोई पत्राचार भी शुरू नहीं हुआ है। हकीकत तो यह है कि प्रशासन, विधायक एवं पूर्व मंत्री को इस घोषणा के बारे में नहीं बता। यही कारण रहा है कि चार वर्षों में कैंसर अस्पताल को लेकर कोई पत्राचार शुरू नहीं हो पाया।
कैंसर का कोई अस्पताल पास नहीं होने से मरीजों को 150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर इलाज करवाना पड़ता था। इससे उनको आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ रही है। डेढ़ वर्ष पहले प्रदेश सरकार ने टोहाना और अंबाला में कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा की थी। उस घोषणा के बाद से महेंद्रगढ़ कैंसर अस्पताल पर संकट के बादल मंडारा रहे हैं अगर नेताओं ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की तो यह अस्पताल महेंद्रगढ़ में देखने को नहीं मिलेेगा।
बता दें कि 29 जुलाई 2017 को भिवानी जिले के गांव प्रेम नगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखी थी। इस मौके पर तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्ढा (वर्तमान भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष) ने 45-45 करोड़ रुपये से महेंद्रगढ़ और मेवात में कैंसर अस्पताल खोलने की घोषणा की थी। उस समय मुख्यमंत्री मनोहर लाल भी उनके साथ थे। ये दोनों ही अस्पताल केंद्र सरकार की ओर से खोले जाने थे। इस घोषणा को चार वर्ष का समय बीत गया है अभी तक इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही किसी सांसद एवं विधायक ने इस संबंध में कभी जिक्र किया। हालांकि यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार द्वारा बनाया जाना है। सांसद ने भी अभी तक किसी बजट सत्र या फिर सदन में इस मामले को नहीं उठाया। केंद्र सरकार की ओर से झज्जर के गांव बाढ़सा में पहले खोला जा चुका है। महेंद्रगढ़ और मेवात में इसकी घोषणा पहले हो चुकी है और अंबाला और टोहाना की घोषणा हो गई है। एक छोटे से प्रदेश में पांच-पांच कैंसर अस्पताल खोलना संभव नहीं है। इससे महेंद्रगढ़ और मेवात के अस्पतालों पर संशय पैदा हो गया है।
150 से 200 किलोमीटर दूर जाकर करवाना पड़ता है इलाज
बता दें कि जिला महेंद्रगढ़ में कैंसर के मरीज बहुत हैं। इन मरीजों को इलाज के लिए 150 से 200 किलोमीटर दूर दिल्ली या जयपुर इलाज करवाने के लिए जाना पड़ता है। वैसे भी कैंसर का इलाज बहुत महंगा होता है। एक मरीज पर आठ से दस लाख रुपये खर्च हो जाते हैं। सबसे अधिक परेशानी तो गरीब तबके मरीजों को होती है जो पैसों के अभाव में इतनी दूर जाकर इलाज नहीं करवा पाते। इलाज के अभाव में उनके मरीज की मौत हो जाती है। तत्कालीन केंद्रीय मंत्री जेपी नड्ढा ने दक्षिण हरियाणा के महेंद्रगढ़ का यह एक बड़ी सौगात दी थी ताकि यहां के मरीजों को इलाज के लिए दूर न जाना पड़े।
न तो प्रशासन, न ही जन प्रतिनिधियों को घोषणा के बारे में जानकारी
इस घोषणा के बारे में न तो यहां के जन प्रतिनिधियों को और न ही प्रशासन को इसकी जानकारी। डीसी और सीएमओ से इस संबंध में बात की गई तो उनको भी इस प्रोजेक्ट के बारे में जानकारी नहीं है। सांसद एवं विधायकों को इसकी जानकारी थी। इसी वजह से प्रोजेक्ट पर विधायक एवं सांसद ने आज तक कोई पैरवी नहीं की। अगर इनको पता होता तो 2017 के बाद जिले में मुख्यमंत्री चार रैली हो चुकी हैं। उनमें इसकी पैरवी की जा सकती थी। एक रैली तो 16 फरवरी को ही दौंगड़ा में की गई है। नेताओं की पैरवी नहीं की गई।
मैं उस रैली में मौजूद नहीं था। इस संबंध में कोई पत्राचार शुरू हुआ या नहीं, इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। मैं इसके बारे में जानकारी लेकर आपको बता दूंगा। -धर्मबीर सिंह, सांसद, महेंद्रगढ़-भिवानी।