फोटो नंबर-24लघुसचिवालय में प्रदर्शन करते कांग्रेसी कार्यकर्ता। स्रोत-प्रवक्ता
नारनौल। मनरेगा के मूल स्वरूप में बदलाव की कोशिशों के विरोध में कांग्रेस पार्टी ने वीरवार को लघु सचिवालय में धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के उपरांत एसडीएम अनिरूद्ध के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाने, अधिकार आधारित योजना को विवेकाधीन योजना में बदलने व 125 दिनों की रोजगार गारंटी को लेकर किए जा रहे भ्रामक दावों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया गया।
धरना-प्रदर्शन में हरियाणा कांग्रेस के सह प्रभारी जितेंद्र भगेल ने मुख्य रूप से शिरकत की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि मनरेगा वर्ष 2005 में यूपीए सरकार द्वारा लागू किया गया एक अधिकार आधारित कानून है जो प्रत्येक ग्रामीण परिवार को रोजगार मांगने का वैधानिक अधिकार देता है।
उन्होंने कहा कि 20 वर्षों से मनरेगा ग्रामीण भारत की जीवन रेखा रही है। कोविड महामारी के कठिन समय में इस योजना के तहत चार करोड़ से अधिक परिवारों को रोजगार मिला, जिससे ग्रामीण आजीविका को संबल मिला।
कांग्रेस जिला अध्यक्ष सतबीर झुकिया ने कहा कि प्रतिवर्ष मनरेगा के माध्यम से पांच करोड़ से अधिक परिवारों को रोजगार मिलता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों की ओर पलायन में कमी आती है। उन्होंने कहा कि यह योजना केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करती है।
किसान कांग्रेस के राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर एवं युवा कांग्रेस के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष कृष्ण राव ने बताया कि ‘मनरेगा बचाओ संग्राम’ राष्ट्रीय स्तर पर शुरू किया गया है, जिसके माध्यम से जनता को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जाएगा।