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उपनिषद का मूल संदेश एकता : सच्चिदानंद

Sun, 25 May 2025 12:57 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो संख्या:66- आर्य समाज दौंगडा अहीर में दो दिवसीय सम्मेलकके शुभारंभ पर हवन करते आयोजक--स्रोत- - फोटो : kahtua
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कनीना। गांव दौगड़ा अहीर में आर्य समाज सम्मेलन का शुभारंभ वैदिक यज्ञ और उपनिषदों की दिव्य गूंज के साथ आरंभ किया गया। पहले दिन कार्यक्रम की अध्यक्षता जगराम आर्य ने की।
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वहीं मंच पर देशभर से आए विद्वान महात्माओं ने अपने विचार रखे। स्वामी सच्चिदानंद सरस्वती ने बताया कि उपनिषदों का मूल संदेश एकता और सत्य पर आधारित है। जब सभी विद्याओं का लक्ष्य एक है, तो ईश्वर को लेकर मतभेद क्यों वास्तव में, ईश्वर को लेकर कोई बहस नहीं होती क्योंकि वह एक ही है।
उन्होंने स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा स्थापित आर्य समाज के दूसरे नियम को पर बताया कि ईश्वर सच्चिदानंद स्वरूप, न्यायकारी तथा दयालु है। उसी की उपासना करनी योग्य है। इस वैज्ञानिक और तर्कसंगत ईश्वर की अवधारणा को समाज में प्रचारित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। कैलाश कर्मठ ने बताया कि अनेक उपनिषद हैं, लेकिन ईशों उपनिषद को अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त है। ऋषि दयानंद द्वारा प्रमाणिक माने गए 11 उपनिषदों को वेदमार्गीं जीवन का आधार बताया।
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आचार्य अमृता आर्य ने भावपूर्ण भजन सारे नाम में है ओम नाम प्यारा, प्रभु के बिना कोई ठिकाना नहीं है से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया। इस दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन, आसपास के गांवों से भारी संख्या में श्रद्धालु पधारे और वैदिक ज्ञानगंगा में डुबकी लगाकर उत्तम संस्कारों को आत्मसात किया। सम्मेलन का प्रथम दिवस आध्यात्मिक चेतना, वैदिक शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के संकल्प के साथ अत्यंत सफल और प्रेरणादायक रहा।
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