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Mahendragarh-Narnaul News: रावण व अंगद संवाद पर दर्शकों ने लगाए जय श्रीराम के जयघोष

Fri, 11 Oct 2024 11:51 PM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, महेंद्रगढ़/नारनौल
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फोटो नंबर-14चांदुवाड़ा की रामलीला में  लक्ष्मण के मूर्छित होने पर  विलाप में डूबे राम की लीला
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नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला ट्रस्ट चांदुवाड़ा के रंगमंच पर राम सेतु निर्माण, अंगद रावण संवाद व लक्ष्मण शक्ति की लीला का भावपूर्ण मंचन किया गया।
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रामलीला में बतौर मुख्यअतिथि पूर्व एसडीओ पंचायती राज संजय सिंगल ने गणेश पूजन के साथ रामलीला का शुभारंभ किया। विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रवीण संघी व पूर्व प्राचार्य ज्ञानचंद राणा, चंद्र स्वरूप शर्मा संरक्षक सूर्यनारायण मंदिर, महावीर अग्रवाल, नवीन बंसल, वासुदेव यादव मौजूद रहे। रामलीला में लंका दहन के बाद हनुमान प्रभु राम को सीता माता का संदेश सुनाते हैं। इसके बाद लंका पर चढ़ाई करने के लिए श्रीराम समुद्र देव के सुझाव पर वानर सेना के नल व नील की सहायता से समुद्र पर सेतु बनाते हैं। सभी वानर सेतु से समुद्र पार कर लंका नगरी में प्रवेश करते हैं। लंका पहुंचकर श्रीराम युद्ध से पूर्व राजकुमार अंगद को शांतिदूत बनाकर रावण के दरबार में भेजते हैं। जहां अंगद के लाख समझाने पर भी रावण माता सीता को लौटाने को तैयार नहीं होता, तब अंगद रावण के दरबार में अपना पैर जमाकर कहते हैं कि अगर तुम्हारी सभा से किसी ने मेरे पैर को हिला भी दिया तो श्रीराम अपनी हार स्वीकार कर अयोध्या वापिस लौट जाएंगे। रावण व अंगद संवाद से दर्शक उत्साहित होकर जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। इसके बाद रामलीला मंचन के अत्यंत मशहूर दृश्य लक्ष्मण शक्ति के दौरान महापराक्रमी लक्ष्मण और इंद्र को जीतने वाले अति बलशाली मेघनाद के बीच युद्ध होता है, जिसमें मेघनाथ लक्ष्मण पर वरदान से प्राप्त अपनी अमोघ शक्ति का प्रयोग करता है। जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। तब भगवान श्रीराम अपने भाई के वियोग में अत्यंत करुणामय होकर कहते हैं कि अब माता सुमित्रा को मैं क्या जवाब दूंगा। इस दौरान रामलीला में लक्ष्मण को जमीन से ऊपर हवा में लेटे हुए दिखाकर राम को विलाप करते हुए दिखाया गया। लक्ष्मण के आगे संताप करते प्रभु राम को देख दर्शक भी भावुक हो गए। इसके बाद लंका के सुषेण वैद्य के परामर्श पर संकटमोचन हनुमान रात में ही संजीवनी बूटी लेने जाते हैं। रास्ते में उन्हें रोकने के लिए रावण कालनेमी राक्षस को भेजता है, परंतु हनुमान कालनेमी का वध कर सभी बाधाओं को तोड़ते हुए संजीवनी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाते हैं। इस अवसर पर संरक्षक शिंभु दयाल गर्ग, जगदीश भारद्वाज, नरेंद्र जैन, विनोद सर्राफ, विष्णु शर्मा, बलवान सैनी, दिनेश भार्गव, मुकेश वालिया, टिंकू जैन, धनप्रकाश व राजेश चांवरिया आदि मौजूद रहे।
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