मंडी अटेली। कस्बे में निरंतर बढ़ रहे बंदरों के आतंक से लोग परेशान है। लोग नगर पालिका प्रशासन से बार-बार बंदरों से छुटकारा दिलाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन समस्या जस की तस है।
कस्बे में बढ़ रही बंदरों की संख्या के कारण महिलाएं और बच्चों में भय व्याप्त है। बंदर हर रोज किसी न किसी वार्ड में बच्चों, बुजुर्गों, राहगीरों व महिलाओं पर हमला कर रहे हैं। बस स्टैंड, झंडा चौक, नांगल बैरियर व सरकारी स्कूल के आसपास बंदरों के झुंड के झुंड देखे जा सकते हैं। बंदरों की बढ़ रही संख्या के चलते गलियों में लोगों का निकला मुश्किल हो गया है। बंदरों की टोलियां घरों में घुस कर घर में रखा सामान उठा कर ले जाती हैं। कई बार देखने में आया है कि बंदर स्कूल जाने वाले बच्चों व राहगीरों पर भी हमला बोल देते हैं। बंदरों के डर से गलियों में, छतों पर बच्चे नहीं खेलते हैं। महिलाएं भी छतों पर कपड़े सुखाने के बाद उनकी रखवाली करती है। बंदर छतों पर सूखने वाले कपड़े ले जाते हैं। लोग बंदरों के आतंक से बचने के लिए अपने घरों के आगे जाल लगवा रहे हैं।
कस्बे में बंदरों के आतंक की शिकायत मिल रही है। लोगों को बंदरों के आतंक से जल्द से जल्द छुटकारा दिलाया जाएगा।
अनिल कुमार, सचिव नगरपालिका अटेली।
दो-तीन दिन में ऐसा केस आ जाता है जिन्हें बंदरों ने काटा हुआ है। बंदर के काटने के बाद रेबीज का इंजेक्शन लगाया जाता है। इसके अलावा कुत्ते के काटने के भी मामले सामने आ रहे हैं। मरीजों के लिए अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन उपलब्ध है।
डॉ. उमेश, चिकित्सा अधिकारी, अटेली ।
बंदरों का आतंक इतना है कि गली से राहगीर अकेले नहीं जा सकता है। गलियों की दीवार पर बंदर टोलियों के साथ बैठे रहते हैं। बंदर हर रोज किसी न किसी मोहल्ले में बच्चों, राहगीरों, महिलाओं को काट रहे हैं। नगर पालिका से मांग है कि बंदरों से छुटकारा दिलाए।
माया गुनगुनावत, गृहणी