नारनौल। साल 2018 में रामपुरा गांव के एक व्यक्ति ने 16 लोगों पर मकान खाली कराने का दबाव बनाने व जबरन कब्जा करने के मामले में कोर्ट में स्टे याचिका दायर की थी। इससे करीब 8 साल सुनवाई करने के बाद साक्ष्यों के अभाव में एडीजे ने स्टे की अपील को खारिज कर दिया है।
जानकारी के अनुसार, रामपुरा गांव के प्रेम कुमार ने कई सालों पहले रामपुरा के ही सुभाष चंद के पिता से एक प्लॉट जबानी करार पर किराए पर लिया था। इस प्लॉट पर उसने अपने पैसे खर्च कर मकान बना लिया और अपने परिवार के साथ रहने लगा।
इसके बाद साल 2018 में सुभाष चंद व उसके परिवार ने प्रेम कुमार से प्लॉट खाली कराने के लिए कहा तो उसने मना कर दिया। सुभाष चंद व परिवार जब दबाव बनाने लगा तो प्रेम कुमार ने सुभाष चंद, चंद्र कला, सतपाल, अशोक, जगदीश, नरेश, महेंद्र, गायत्री देवी, गिन्नी, गीता, ललित, देवराज, अमीलाल, पवन, जसवंत व प्रवीण सहित कुल 16 लोगों के खिलाफ 31 मार्च 2014 में थाने में शिकायत दे दी।
फिर मामला कोर्ट में पहुंचा। प्रेम कुमार का वकील उचित गवाह व साक्ष्य पेश नहीं कर पाया तो एडीजे नितिन राज ने स्टे की अपील को खारिज करते हुए सुभाष चंद व अन्य के हक में फैसला सुनाया।
2014 में भी खारिज हो चुकी थी याचिका
उक्त मामले से पूर्व साल 2014 में भी प्रेम कुमार से जब प्लॉट खाली कराने के लिए कहा गया था। उस दौरान भी उसने कोर्ट में स्टे याचिका दायर की थी जो खारिज कर दी गई थी। इसके बाद 2018 में उसने उक्त फैसले के खिलाफ 2018 में एडीजे कोर्ट में अपील की थी और वो भी खारिज कर दी गई है।