श्रावण मास बुधवार से शुरू हो गया। वैसे तो अनेक लोगों ने मंगलवार को गुरु पूर्णिमा से ही भगवान भोले की पूजा अर्चना शुरू कर दी है लेकिन श्रावण मास की शुरुआत बुधवार से ही हुई। इसी के साथ शहर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ी।नारनौल के प्राचीन मोडावाला मंदिर में श्रावण मास की शुरुआत के कारण विशेष तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। जिसके चलते शिव भक्त पूरे मास भगवान शिव की पूजा अर्चना करेंगे। शहर के प्रमुख शिवालयों पर तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। शहर के मोडावाला शिव मंदिर, मोटा महादेव मंदिर, मसानी के पास स्थित शिवालय, छोटा बड़ा तालाब स्थित शिवालय सहित अनेक शिवालयों पर भक्तों का तांता लगने लगा है।
वहीं इन मंदिरों को भक्तों के लिए सजाया जा रहा है। पूरे श्रावण मास भक्त सुबह-सुबह भगवान शिव शंकर का जलाभिषेक करेंगे। आचार्य क्रांति निर्मल ने बताया कि जो व्यक्ति प्रदोष के समय श्रावण मास में भगवान की पूजा अर्चना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। निर्धन-धनवान, मूर्ख विद्वान, पुत्रहीन, पुत्रवान, रोगी, निरोगी, म्रियमाण आयुष्मान हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में सोमवार के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर सदाशिव का ध्यान करते हुए स्नान आदि से निवृत्त होकर शिव परिवार का पूजन करें। उन्होंने बताया कि श्रावण के सोमवार में एक बार भोजन का प्रावधान है। श्रावण मास में पार्थिव शिव पूजा, लघुरुद्र, महारुद्र, अतिरुद्र व रुद्राभिषेक का भी बहुत महत्व है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति श्रावण मास में शंकर जी पर एक लाख बेल पत्र चढ़ाता है, उसके तीन जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं।