फोटो नंबर-14राजकीय स्कूल में बच्चों को पढ़ाती अध्यापिका। संवाद
नारनौल। सरकारी स्कूलों में शिक्षण स्तर को मजबूत करने के लिए शिक्षा निदेशालय ने शिक्षकों से गैर-शैक्षिक काम बंद करने के निर्देश दिए है। जिला शिक्षा अधिकारी सुनील दत्त यादव ने बताया कि जिले के सभी शिक्षकों को गैर-शैक्षिक कार्यों से मुक्त कर दिया गया है।
सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों, जिला परियोजना समन्वयकों और खंड शिक्षा अधिकारियों को निदेशालय ने सरकारी स्कूलों के शिक्षकों से किसी भी प्रकार का गैर-शैक्षिक कार्य न लिए जाने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं।
उन्होंने बताया कि निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 की धारा 27 के अनुसार अध्यापकों को किसी भी प्रकार के गैर-शैक्षिक कार्य में नहीं लगाया जा सकता है। कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे जनगणना, आपदा प्रबंधन या चुनावी कार्य को छोड़कर।
इन वैधानिक छूटों के अलावा किसी भी तरह का प्रशासनिक, ऑफिस या सामाजिक कार्य शिक्षकों को सौंपना कानूनन गलत है। इसलिए निदेशालय में सभी अधिकारियों को अधिनियम के एक्ट का सख्ती से पालना करने के निर्देश दिए है। जिसे जिले में पूरी तरह से लागू किया गया है।
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शैक्षणिक गुणवत्ता सुधार की दिशा में कदम
हरियाणा विद्यालय अध्यापक संघ के पूर्व राज्य सचिव धर्मपाल शर्मा इस फैसले को समय की मांग बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षकों के गैर-शैक्षिक कार्यों में उलझने से स्कूलों में पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही थी और इसका सीधा असर कमजोर प्रदर्शन, कम रिजल्ट और सीखने के स्तर में गिरावट के रूप में दिखाई दे रहा था। अब शिक्षकों को पूर्ण रूप से कक्षाओं के लिए उपलब्ध कराने से न केवल पढ़ाई में निरंतरता आएगी बल्कि वार्षिक परीक्षाओं की तैयारी भी सुदृढ़ होगी।