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कई सालों बाद इस बार टारगेट पूरा होने की उम्मीद

Sun, 06 Nov 2016 12:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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इस बार क्षेत्र में अच्छी बरसात हुई है, अगस्त व सितंबर माह में बरसात होने के बाद से ही किसानों को रबी की फसल अच्छी होने की उम्मीद जगने लगी थी। इसी उम्मीद के बाद इस बार किसानों ने कृषि विभाग द्वारा निर्धारित टारगेट के हिसाब से बुआई भी की है। किसानों द्वारा की गई सरसों की बुआई के बाद लगता है कि इस बार रबी की फसल के लिए निर्धारित टारगेट को किसान छू जाएंगेे। ऐसे में चार-पांच साल का रिकार्ड भी टूट जाएगा। क्षेत्र के किसान इस बार करीब 75 से 80 हजार हेक्टेयर में सरसों की बुआई कर चुके हैं। वहीं चने व गेहूं की बुआई जारी है।
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क्षेत्र के किसानों के लिए रबी की फसल प्रमुख फसल मानी जाती है। कुओं में पानी नहीं होने के कारण यहां के किसान फसलों को लेने के लिए पूर्ण रूप से बरसात व नहरों पर निर्भर हैं। नहर भी कभी-कभार ही आती हैं। ऐसे में किसान बरसात से ही ज्यादा आस लगाते हैं। गत चार-पांच साल से अच्छी बरसात नहीं होने के कारण किसान रबी की फसल भी नहीं ले पा रहे थे तथा कृषि विभाग द्वारा निर्धारित रकबे पर भी बिजाई नहीं हो पा रही थी, मगर इस बार क्षेत्र में अच्छी बरसात होने की वजह से किसान खुश हैं तथा फसलों की बिजाई में लगे हुए हैं। इससे उम्मीद लगाई जा रही है कि इस बार किसान विभाग द्वारा निर्धारित टारगेट को पूरा कर पाएंगे।
रबी की फसल की बुआई का मुख्य समय
जिला में रबी की फसल की बिजाई का यह मुख्य समय है। जिला में मुख्य रूप से सरसों की फसल की बुआई होती है। सरसों की फसल जिला में 1 लाख हेक्टेयर में की जाती है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार इसकी बिजाई का मुख्य समय 15 अगस्त से दस सितंबर व एक अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक होतना है। जहां तापमान कम होने लग जाता है, वहां यह फसल दस सितंबर तक तथा जहां तापमान ज्यादा रहता है, वहां यह फसल 25 अक्टूबर तक बोई जाती है। इस बार जिला में करीब 75 से 80 हजार हेक्टेयर में सरसों की बिजाई हो चुकी है, जबकि गत वर्ष यह 50 से 60 हजार हेक्टेयर में ही हुई थी।
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25 हजार हेक्टेयर बारानी जमीन पर बोई जाती है फसल
यहां पर करीब 25 हजार हेक्टेयर बारानी भूमि पर सरसों की फसल बोई जाती है। गत वर्ष इसमें केवल 10 हजार हेक्टेयर में ही फसल बोई गई थी, जबकि इस वर्ष यह बढ़कर 15 से 20 हजार हेक्टेयर होने का अनुमान है।
यह है बारानी क्षेत्र
भूजल रिचार्ज नहीं होने के कारण नांगल चौधरी व निजामपुर के क्षेत्र के अलावा मूलोदी, बिगोपुर, खातोली, नांगल पीपा, धोलेड़ा, मेघोत, सिलारपुर, भोजावास, भुंगारका, सिरोही बहाली, नांगल कालिया, मोहनपुर, नंगली, मुरारीपुर, कांवी, मामराज की ढ़ाणी व खानपुर समेत 40 गांवों की 25 हजार हेक्टेयर बारानी क्षेत्र कहलाता है।
चने की बिजाई पर भी है जोर
जिले में चने की बिजाई 15 हजार हेक्टेयर में होती है। गत वर्ष यह पांच से छह हजार हेक्टेयर में ही हुई थी। मगर इस बार इसका रकबा बढ़ने का अनुमान है। कृषि विशेषज्ञों की माने तो जिला में इस बार करीब 10 से 12 हजार हेक्टेयर में चना बोया जाएगा। चना सबसे ज्यादा दोहान पच्चीसी व नलवाटी क्षेत्र में बोया जाता है। चने की बिजाई का समय अभी चल रहा है तथा नवंबर माह के अंत तक चने की बिजाई की जा सकती है। हालांकि कई जगह बिजाई का काम पूरा भी हो चुका है।
 गेहूं के रकबे को भी छूयेगा टारगेट
जिला में करीब 50 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई की जाती है। गेहूं की बिजाई अटेली, कनीना व महेंद्रगढ़ क्षेत्र में ज्यादा होती है। इस बार नारनौल व नांगल चौधरी क्षेत्र के किसान भी गेहूं की बिजाई कर रहे हैं। ऐसे में इस बार 40 से 45 हजार हेक्टेयर में गेहूं की बिजाई होने का अनुमान है।
-25 तक कर सकते हैं गेहूं की बिजाई
किसान 25 नवंबर तक गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। गेहूं की बिजाई के लिए तापमान का 25 डिग्री सेल्सियस के आसपास होना आवश्यक है। अभी न्यूनतम तापमान 10 से 11 तो अधिकतम तापमान 28 से 30 चल रहा है। ऐसे में एक-दो दिन बाद तापमान कम होते ही किसान 25 तक गेहूं की फसल की बुआई कर सकते हैं।

''क्षेत्र में भूजल तो है नहीं, इस बार बारिश ठीक हुई है। जिसके कारण रबी की फसल को लेकर उम्मीद बनी है।
अमित, कमानिया
''इस बार सरसों व चने की फसल ज्यादा बोई है। बारिश सही होने से रकबा बढने की उम्मीद है।
कृष्ण, रोपड़ सराय
''कई वर्षों से कम बारिश के कारण फसल नहीं ले रहे थे, लेकिन इस बार अधिकांश किसानों ने बुआई की है। ---रामकुमार, दताल
--इतने रकबे में होती है बिजाई
सरसों        एक लाख हेक्टेयर
गेहूं           50 हजार हेक्टेयर
चना          15 हजार हेक्टेयर
जौ            02 हजार हेक्टेयर
''सरसों की बिजाई का समय चला गया है। अब चने व गेहूं की बिजाई चल रही है। इस बार रबी की फसल का टारगेट हर वर्ष जितना ही रखा गया है, जो इस बार लगभग पूरा होने की उम्मीद है। बरसात सही होने के कारण किसान इस बार चने व गेहूं की खेती भी कर रहे हैं।
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---संजय यादव, एसडीओ, कृषि विभाग, नारनौल
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