फोटो नंबर-11नारनौल रेवाड़ी रोड के जलघर में बना वाटर टैंक। संवाद
नारनौल। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था मुख्य रूप से रेवाड़ी रोड और नसीबपुर स्थित दो बड़े जलघरों पर निर्भर है। गर्मी के मौसम को देखते हुए जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने करीब दो महीने पहले दोनों जलघरों के वाटर टैंकों और मशीनरी की मरम्मत पर लाखों रुपये खर्च किए थे ताकि लोगों को पर्याप्त पानी मिल सके।
रेवाड़ी रोड स्थित जलघर में करीब पांच लाख रुपये की लागत से वाटर टैंक की मरम्मत करवाई गई। वहीं, नसीबपुर जलघर के टैंक को लगभग साढ़े चार लाख रुपये खर्च कर दुरुस्त किया गया।
इसके अलावा, नसीबपुर जलघर में पानी की सप्लाई सुचारू रखने के लिए करीब सात लाख रुपये की लागत से पंप सेट और मोटर की मरम्मत भी कराई गई थी। तकनीकी रूप से दोनों जलघर अब बेहतर स्थिति में बताए जा रहे हैं लेकिन सबसे बड़ी समस्या पानी की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है।
बढ़ती गर्मी के कारण पानी की मांग लगातार बढ़ रही है जबकि जलघरों तक पर्याप्त नहरी पानी नहीं पहुंच पा रहा। इसका असर शहर के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति पर पड़ने लगा है। लोगों का कहना है कि गर्मी के दिनों में पानी की खपत स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
रेवाड़ी रोड स्थित चार छोटे वाटर टैंकों से शहर में करीब 30 प्रतिशत पानी की सप्लाई होती है जबकि नसीबपुर के तीन बड़े टैंक पूरे शहर की लगभग 70 प्रतिशत जलापूर्ति संभालते हैं। ऐसे में पानी की कमी आने पर पूरे शहर पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।
वर्जन:
गर्मी शुरू होने से पहले ही विभाग की ओर से वाटर टैंकों की मरम्मत करा दी गई थी। वाटर टैंक साफ करवा कर इन्हें ठीक करवाया गया जिससे अधिक पानी टैंकों में जमा किया जा सके। इसके अलावा मशीनों को भी दुरुस्त करवा दिया गया था।
-नरेश चंदेला कनिष्ठ अभियंता जनस्वास्थ्य विभाग, नारनौल