जिसमें पूर्व विधायक रघु यादव, राधेश्याम गोमला, सतबीर झुकिया मुख्य रूप से मौजूद रहे। जिसमें संगठन का गठन व संघर्ष की रूपरेखा बनाई गई। महापंचायत में गांव कमानियां, बनिहारी, मेघोत हाला, दताल, घोलेडा, भूगारंका, सिरोही बहाली, शिमली, नांगल कालिया, शहबाजपुर, दोस्तपुर, भेटंडी, दौखेरा आदि गांवों के पंचायत प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
पूर्व विधायक रघु यावद ने कहा कि महेंद्रगढ़ जिले में व्यवसायिक कारखाने स्थापित नहीं होने के कारण ग्रामीणों का रोजगार खेतीबाड़ी पर निर्भर है लेकिन पिछले कई सालों से बारिश नहीं हो रही है। भूजल रिचार्ज नहीं होने के कारण बोरवेलों का पानी सूख गया। खेतीबाड़ी प्रभावित होने के बाद ग्रामीणों का रुझान पशुपालन की ओर बढ़ा लेकिन अब 1500 फीट से अधिक गहराई तक भूजल स्रोत नहीं मिल रहे। जोहड़ों में पानी उपलब्ध नहीं होने से पशुपालन व्यवसाय भी ठप हो गया। समाधान के लिए सरकार द्वारा महेंद्रगढ़ जिले के तीन ब्लाक डार्कजोन घोषित कर दिए गए, लेकिन पानी की व्यवस्था को लेकर गंभीर नहीं है। उन्होंने कहा कि 8 अप्रैल 1982 को पंजाब के कपूरी कस्बे में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंद्रा गांधी ने नहर खुदाई का शुभारंभ किया लेकिन 5 नवंबर 1985 पंजाब सरकार ने पिछले सभी समझौते रद्द कर दिए। इसके बाद एसवाइएल नहर राजनीतिक अखाड़ा बनी हुई है।
इस मौके पर जगदीश गोद, कांवी के पूर्व सरपंच शमशेर सिंह, बलकार कांवी, श्रीचंद यादव, अतरसिंह, प्रधान प्रेमराज, सरपंच रामदत, बबलू यादव, सोनू तंवर, रोशनी देवी, विजय सिंह आदि मौजूद रहे।
बनेगा गैर राजनीतिक संगठन
पूर्व विधायक ने कहा कि नहरी जल का समुचित बटवारा करवाने के लिए गैर राजनीतिक संगठन बनेगा। जिसका स्वरूप एक फरवरी को निर्धारित किया जाएगा। नांगल चौधरी हलके की कमान राजेंद्र प्रसाद भुंगारका, सतबीर झुकिया को महेंद्रगढ़ तथा राधेश्याम गोमला को कार्यकारी प्रधान की जिम्मेदारी सौंपी गई।
डार्कजोन को मिले प्राथमिकता
राजेंद्र प्रसाद भुंगारका ने बताया कि डार्कजोन में ग्रामीणों की कृषि व पेयजल नहरी पानी पर निर्भर है। डिमांड के मुताबिक पानी करवाना सरकार की जिम्मेदारी है। जितना पानी प्रदेश में उपलब्ध है, उसका समुचित बंटवारा करना जरूरी है।
पानी की लड़ाई में सदैव रहूंगा साथ
पूर्व विधायक रघु यादव ने कहा कि पिछले 30 साल से एसवाइएल पानी की लड़ाई लड़ रहा हूं। जिसका अभी समाधान संभव नहीं लगता। सरकार को उपलब्ध पानी का समुचित बंटवारा करना होगा। इसके संघर्ष में सदैव किसानों के साथ रहूंगा।