संवाद न्यूज एजेंसी
नारनौल। अरावली पर्वतमाला की 100 मीटर ऊंचाई के आधार पर तय की गई परिभाषा को लेकर उठे विरोध के बीच सर्वोच्च न्यायालय ने इस पर रोक लगाते हुए सात सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। समिति विभिन्न हितधारकों की राय लेकर अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपेगी। इसी क्रम में मंगलवार को गुरुग्राम स्थित राजकीय विश्राम गृह में हरियाणा के हितधारकों के साथ बैठक की गई।
बैठक में हरियाणा पर्यावरण संरक्षण एवं शोध समिति के अध्यक्ष एवं पर्यावरणविद डॉ. रामनिवास यादव तथा अरावली बचाओ मंच के संयोजक अमरजीत सिंह बडेसरा ने अपने सुझाव रखे। डॉ. यादव ने कहा कि केवल ऊंचाई के आधार पर अरावली की पहचान तय करना वैज्ञानिक, तर्कसंगत और न्यायसंगत नहीं है।
उन्होंने कहा कि करीब दो अरब वर्ष पुरानी अरावली पर्वतमाला भूजल संरक्षण, मरुस्थलीकरण रोकने, जलवायु संतुलन और लाखों लोगों की आजीविका के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में इसकी सुरक्षा के लिए अलग अरावली प्राधिकरण बनाया जाए और इसे भारत की प्राचीन पर्वत विरासत का कानूनी दर्जा दिया जाए।
अमरजीत सिंह बडेसरा ने कहा कि अरावली से किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या खनन के गंभीर पर्यावरणीय दुष्परिणाम होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनभावनाओं को देखते हुए अरावली में खनन किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। बैठक में समिति ने सभी पक्षों की बातें ध्यानपूर्वक सुनीं और आश्वासन दिया कि सभी सुझावों को अपनी रिपोर्ट में शामिल कर सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा।