फोटो नंबर- 14हुडा सेक्टर में विचरते गोवंश। संवाद
नारनौल। शहर में आवारा घूमते गोवंश को पकड़ने के दावे कागजों तक ही सीमित दिखाई दे रहे हैं। इसी का परिणाम है कि बेसहारा गोवंश सड़कों पर, गलियों और कॉलोनियों में झुंड में विचरण करते नजर आ रहे हैं। साथ ही, वाहन चालक के भी घायल होने की संभावना बनी रहती है।
शहर में यहां वहां विचरते गोवंश में लंपी नामक संक्रमण भी फैलने लगा है और इसकी रोकथाम के लिए पशु चिकित्सकों की टीम ने दो तीन दिन तक शहर में दौरा कर इन गोवंशों की जांच भी की थी। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग ने तो अपनी मुस्तैदी दिखाई लेकिन नप अभी तक कछुआ चाल ही चल रहा है।
पशु चिकित्सक की माने तो सर्दी के मौसम में खासकर सांड, गर्मी की तुलना में अधिक उत्तेजित व आक्रामक हो जाते हैं। ऐसे में सांड आपस में भिड़ जाते हैं और उनकी भिड़ंत का खामियाजा अक्सर आमजन को भुगतना पड़ता है। इससे शहर के पहले भी कई हादसे हो चुके हैं।