- हिसार की टीम ने किया लगभग 15 गांवों के खेतों का निरीक्षण, बीमारी से बाजरे के खेतों में 30 प्रतिशत तक नुकसान
- टीम में शामिल वैज्ञानिकों ने बीमारी में स्टेम रॉट होने का किया दावा
फोटो संख्या: 72 और 73संवाद न्यूज एजेंसी
महेंद्रगढ़। बाजरे में फैल रही स्टेम रॉट बीमारी को लेकर चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार की टीम ने लगभग 15 गावों का निरीक्षण किया। इस दौरान सभी गांवों के खेतों में हिसार टीम में आए डॉ. विनोद मलिक ने बाजरे की फसल में स्टेम रॉट बीमारी होने का दावा किया है। बीमारी से 5 से 30 प्रतिशत बाजरे की फसल को नुकसान हो गया है। अगर किसान बीमारी से ग्रस्त बाजरे को नहीं उखाड़ेंगे तो यह बीमारी पूरे खेत में फैल जाएगी। डॉ. मलिक ने बताया कि यह लाइलाज बीमारी है। सावधानी ही बचाव है। इस बीमारी के इलाज के लिए परीक्षण किए जा रहे हैं।
कुछ दिनों से कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के पास बाजरे में रोग की शिकायतें आ रही थीं। विभाग के एसडीओ डॉ. अजय यादव विभाग के डॉक्टर्स को भेजे कर इसको चेक करवा रहे थे, लेकिन विभाग के चिकित्सकों को बीमारी के बारे में पता नहीं लग सका। इसके बाद एसडीओ ने क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र बावल वैज्ञानिकों से कुछ खेतों का निरीक्षण करवाया था, तो उन्होंने बाजरे में स्टेम रॉट बीमारी की आशंका जाहिर की। इसके बाद डॉ. अजय यादव ने चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय को बाजरे की फसल चेक करने के लिए लेटर लिखा था। मंगलवार को दो सदस्य डॉ. विनोद मलिक और डॉ. हर्षदीप खेतों का निरीक्षण करने पहुंचे थे।
इन गांवों का किया निरीक्षण
टीम में हिसार से आए डॉ. विनोद मलिक, डॉ. हर्षदीप, महेंद्रगढ कृषि एवं कल्याण विभाग से डॉ. अजय यादव, डॉ. सज्जन सिंह, डॉ. मनोज डाबला, डाॅ. सत्यप्रकाश ने महेंद्रगढ़ खंड के गांव सिसोठ, धौली, आदलपुर, आकोदा, बवाना, बसई, मालड़ा, बुचौली तथा कनीना खंड के गांव आनावास, , झगड़ौली, गुढ़ा, इसराना, खरकड़ाबास, कनीना और कोटिया आदि गांवों में जाकर बाजरे की फसलों का निरीक्षण किया। इस दौरान टीम को खेतों में 5 से 30 प्रतिशत का नुकसान मिला।
बचाव के लिए सलाह
डॉ. विनोद मलिक ने बताया कि अभी बाजरे के जो पौधे रोग ग्रस्त हैं, उनको उखाड़ना होगा। बाद में रोग ग्रस्त खेत की कड़बी का अलग से प्रबंधन करना होगा। अगली बीजाई के समय खेत में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि कुछ हाईब्रीड चिह्नित किए गए हैं, उन हाइब्रीड से परेज रखें। उन हाइब्रीड में बीमारी ज्यादा आने की संभावना है।
35 डिग्री से ऊपर तापमान में फैलती है बीमारी
डॉ. विनोद मलिक ने बताया कि यह बीमारी बाजरे में 35 से अधिक तापमान, बारिश तथा उमस में यह बीमारी बहुत तेजी से फैलती है। कुछ दिनों में पूरे खेत में फैल जाती है। इसके अलावा बीमार खेत का पानी स्वस्थ खेत में जाएगा तो उससे भी यह बीमारी फैलती है। क्योंकि यह बैक्टिरीयल बीमारी है और बैक्टीरिया हवा, पानी सब जगह होते हैं।
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कैसे करें बीमारी का पता
डॉ. विनोद मलिक ने बताया कि पत्तियों पर लंबी-लंबी धारियां बन जाती हैं। धीरे-धीरे पूरे पौधे पर दिखाई देने लगती है। इसके बाद पत्तियों पर पानी जैसे धब्बे दिखाई देने लगते हैं। पौधा पहले भूरा तथा बाद में काला पड़ जाता है। हलकी सी हवा चलने पर पौधा गिर जाता है।
बाजरे की फसल (कुल एरिया हेक्टेयर में)
खंड - कुल एरिया
महेंद्रगढ़ - 34742
कनीना - 19120
नारनौल - 16200
अटेली - 16000
नांगल चौधरी - 14800
कुल - 100862
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वर्जन:
पिछले 20 दिनों से हम बीमारी के बारे में पता लगाने का प्रयास कर रहे थे। आज महेंद्रगढ़ एवं कनीना खंड के लगभग 15 गांवों के खेतों का निरीक्षण किया। हिसार से आई वैज्ञानिकों की टीम ने बाजरे में स्टेम रॉट बीमारी होने का दावा किया है। इस बीमारी का अभी कोई इलाज नहीं है। खेतों में 5 से 30 प्रतिशत बीमारी फैल रही है।
- डॉ. अजय यादव, एसडीओ, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, महेंद्रगढ़।
वर्जन:
यह एक बैक्टीरियल बीमारी है। इस बीमारी को स्टेम रॉट या तना गलन बीमारी कहते हैं। अभी सावधानी ही इसका उपाय है। वर्तमान में इस बीमारी के इलाज के लिए परीक्षण किया जा रहा है।
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डॉ. विनोद मलिक, असिस्टेंट प्लांट पैथोलॉजिस्ट व बाजरा रोग विशेषज्ञ, चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय हिसार