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स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स बना खंडहर, कैसे तैयार होंगे खिलाड़ी

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खेल स्टेडियम में दरवाजे और शीशे टूटे हुए। - फोटो : Narnol
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पिछले दस वर्ष पहले 92 लाख रुपये से बनाया गया शहर का एक मात्र स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स रख रखाव के अभाव में खंडहर बन गया है। स्टेडियम के दरवाजे, खिड़कियां, शीशे सब टूट चुके हैं। कमरे में कबाड़ भरकर रखा है। पांच छह वर्ष पहले फिटनेस मेंटेन रखने के लिए जिम भी बनाया गया था जो अब कबाड़ हो चुका है। जिम की एक मशीन भी ठीक नहीं है। दस वर्षों से स्टेडियम बिना नाम के ही चल रहा है। अभी तक स्टेडियम का नामकरण भी नहीं हुआ है। खेल परिसर महेंद्रगढ़ के नाम से ही जाना जाता है। इतना ही नहीं रात में स्टेडियम शराबियों का अड्डा बन जाता है जहां पर लोग बैठक कर शराब पीते हैं। पिछले कुछ वर्षों से न तो यहां कोच और न ही खेलने की सुविधा है। ऐसे में कैसे यहां खिलाड़ी तैयार होंगे?
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बता दें कि 20 दिसंबर 2006 को खेल स्टेडियम का शिलान्यास कांग्रेस के तत्कालीन केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह एवं पूर्व संसदीय सचिव राव दान सिंह की उपस्थिति में किया गया था। 2010 में यह बनकर तैयार हो गया था। इसी वर्ष तत्कालीन मुख्यमंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह हुड्डा द्वारा इसका लोकार्पण तत्कालीन गृह एंव खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग मंत्री गोपाल कांडा, सांसद श्रुति चौधरी तथा सीपीएस राव दान सिंह की उपस्थिति में उद्घाटन किया गया था। पिछले दस वर्षों में खेल एवं युवा कल्याण विभाग द्वारा दस बार भी खेल नहीं करवाए गए। विभाग ने खेल स्टेडियम बनने के बाद यहां एक भी नियमित कोच की नियुक्ति नहीं की ताकि बच्चों को वो खेल की कोचिंग दे सके। यहीं कारण रहा कि 92 लाख रुपये की राशि खर्च होने के बाद भी यहां से राष्ट्रीय स्तर का एक खिलाड़ी तैयार नहीं हो पाया। सरकार की यह राशि जिस उद्देश्य के लिए लगाई गई थी, वो दस वर्ष बाद भी पूरा नहीं हुआ।
शुरुआत में थी ये सुविधाएं
प्रदेश सरकार ने क्षेत्र के युवाओं को खेल स्टेडियम की एक सौगात दी थी। सरकार का उद्देश्य पिछड़े क्षेत्र से खेल प्रतिभा को आगे लाने के लिए था। इस पर सरकार ने 92 लाख रुपये खर्च भी किए थे। स्टेडियम का एक सुंदर भवन भी बनाया गया। मैदान में 400 मीटर की ट्रैक भी बनाया गया था। बाद में पंचायती राज ने 3-4 लाख रुपये खर्च कर युवाओं की फिटनेस के लिए जिम भी खोली थीं। लेकिन यहां किसी कर्मचारी की नियुक्ति नहीं होने के कारण सारा सामान चोरी हो गई। वर्तमान में वहां कोई चीज शेष है तो केवल भवन की दीवारें और सुनी चौखटें ही हैं। दर्शकों के बैठने के लिए बनाई गई सीढ़ियों के पत्थर भी उखाड़ ले गए। बिजली मीटर और फिटिंग में उखड़ी हुई है।
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दो बार हो चुकी हैं चोरियां
स्टेडियम में कर्मचारी नहीं होने के कारण दो बार सामान चोरी हो चुका है। इसकी रिपोर्ट भी पुलिस में दर्ज करवाई गई थी। बावजूद इसके स्टेडियम में कोई चौकीदार नहीं लगाया गया। अब जब सब कुछ चोरी हो चुका है तो खंडहर भवन की रखवाली के लिए चौकीदार रखने की अनुमति मिली है।
रैली के काम आता है मैदान
खेल स्टेडियम महेंद्रगढ़ में अब रैलियां आयोजित करने के लिए रह गया है। कांग्रेस की दो रैलियों हो चुकी हैं। पहले यह दिवाली पर पटाखे की दुकान लगाने के लिए काम भी आता था। तीन चार वर्ष लगातार यहां पटाखे की दुकानें भी लगाई थीं।
खेल स्टेडियम महेंद्रगढ़ की 9 लाख रुपये से रिपेयिरंग का काम किया जाएगा। इसके टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। प्रक्रिया खत्म होने के बाद इस पर कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
- सोमदत्त शर्मा, पीडब्ल्यूडी बी एंड आर, महेंद्रगढ़।
स्टेडियम की रिपेयरिंग के लिए डिपार्टमेंट ने पैसे जमा करवा रखें हैं। पीडब्ल्यूडी बी एंड आर इसकी रिपेयरिंग करेगी। इसके टेंडर प्रक्रिया प्रोसेस में हैं।
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- जगदीश शर्मा, उपायुक्त महेंद्रगढ़।
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