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Mahendragarh-Narnaul News: किसी को मिली खुशी तो कुछ हुए निराश, 9046 केसों का किया गया निपटान

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फोटो नंबर- 24लोक अदालत में केसों का निपटारा करते न्यायाधीश। स्रोत : प्रशासन
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नारनौल। न्यायिक परिसर में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत में सबसे ज्यादा चालान कम करवाने के केस रहे। किसी को चालान कम होने की खुशी मिली तो किसी के चालान को बरकरार रखा गया और निराशा हाथ लगी। अधिकतर चालान में कमी की गई लेकिन ड्रिंक एंड ड्राइव के केस में लोगों को रियायत नहीं दी गई।
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वहीं बिजली बिल अधिक होने की शिकायत लेकर भी लोग लोक अदालत पहुंचे। जिन्हें हेल्प डेस्क पर कार्यरत अधिवक्ताओं द्वारा समझा कर वापिस भेजा गया। क्योंकि लोक अदालत में केवल उन्हीं केस का निपटान किया जाता है जो पहले से अदालत में लंबित चल रहे हो या पंजीकरण करवाया हुआ हो।
लोक अदालत में 9,046 केसों का निपटान किया गया और मोटर वाहन दुर्घटना श्रेणी के विभिन्न मामलों में 1,33,63000 रुपए का मुआवजा दिया गया। सीजेएम नीलम कुमारी ने बताया कि लोक अदालत में वाहन दुर्घटना मुआवजा केस, वैवाहिक मामले, वाहन चालान संबंधित मामले, जमीन अधिग्रहण मुआवजा से सम्बन्धित मामले, दीवानी मामलों को रखा गया।
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उन्होंने बताया कि कुल 12,720 केस निपटारे के लिए रखे गए जिनमें से 9,046 केसों का फैसला किया गया। वहीं 21 केस मोटर वाहन दुर्घटना के रखे गए।
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लोक अदालत से लोगों को उम्मीद होती है कि उनके काटे गए चालान को कम किया जाएगा। इस बार लोक अदालत में बहुत कम लोगों को रियायत दी गई। जिससे अधिकतर लोगों को लोक अदालत से निराशा हाथ लगी।
सुभाष चंद, एडवोकेट, नारनौल
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मैनें सितंबर में सैकंड हैंड बाइक खरीदी थी और इसी दौरान एनओसी भी प्राप्त की थी। सितंबर के मध्य में मेरे पास जुलाई का चालान आया। अगर जुलाई में चालान लंबित था तो मुझे एनओसी क्यों दी गई। यह पुलिस की लापरवाही है और परेशानी का सामना हमें करना पड़ रहा है।
नवीन कुमार, गांव गुवानी।
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ट्रिपल राइडिंग सहित अन्य कारणों के चलते कुछ दिन पहले 23 हजार रुपये का चालान किया गया था। इतने अधिक चालान के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। लोक अदालत में मेरे चालान को कम करते हुए 4200 रुपये कर दिया जिससे राहत मिली है।
सुरेश, गांव कनीना

बिजली बिल करीब 33 हजार रुपये था जिसका ब्याज माफ करवा कर मैंने बिजली बिल भर दिया। इसके बाद भी बिल में रुपये जुड़ कर आ रहे हैं। इसके समाधान के लिए लोक अदालत आई थीं लेकिन यहां पता चला कि पहले से लंबित व पंजीकृत मामलों की ही सुनवाई की जा रही है।
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निर्मला देवी, मोहल्ला, पुल बाजार
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