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सामूहिक प्रयासों से ही सामाजिक समरसता को सहेज सकते हैं : अशोक

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फोटो 21 कार्यक्रम में मौजूद अति​थिगण। संस्थ
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नारनौल। जब संगठन परिवार बन जाता है, तब हर सदस्य सुरक्षित और सशक्त महसूस करता है। यही भावना समाज को आगे बढ़ाने में सहायक होती है। ये विचार सोमवार को अग्रवाल वैश्य समाज के प्रदेश अध्यक्ष अशोक बुवानीवाला ने नववर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित पारिवारिक मिलन संध्या कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किए।
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समारोह का शुभारंभ करते हुए बुवानीवाला ने कहा कि आज का ये आयोजन संगठन को एक परिवार के रूप में देखने और आपसी रिश्तों को मजबूत करने का सशक्त मंच बना है। आज के दौर में जब व्यक्तिवाद बढ़ता जा रहा है और संयुक्त परिवार या समाज की अवधारणा कमजोर हो रही है। ऐसे समय में सामाजिक संगठनों की भूमिका एक परिवार के रूप में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते सामाजिक परिवेश, व्यस्त जीवनशैली और डिजिटल युग की दौड़ में जहां पारिवारिक और सामाजिक रिश्ते कमजोर पड़ते जा रहे हैं। ऐसे दौर में सामूहिक प्रयासों द्वारा ही पारिवारिक एवं सामाजिक समरसता को सहेजकर रखा जा सकता हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपने ही समाज और रिश्तों से कटते जा रहे हैं। ऐसे में संगठन का दायित्व केवल सामाजिक कार्यक्रम आयोजित करना ही नहीं, बल्कि लोगों को जोड़ना, सुनना और समझना भी है।
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