फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आगजनी हुई तो कैसे निपटेगा प्रशासन

Sun, 01 Nov 2015 01:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला भिवानी
विज्ञापन
विज्ञापन
नारनौल। त्यौहारी सीजन की शुरूआत हो चुकी है। दीपावली को भी अब महज दस दिन बच गए हैं, मगर प्रशासनिक व्यवस्थाएं अभी अधूरी हैं। इसके कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। दीपावली के मौसम में पटाखों से आगजनी की काफी घटनाएं होती हैं। वहीं जिला में इन घटनाओं से निपटने के लिए पर्याप्त साधन नहीं हैं। कस्बों की तो बात दूर जिला मुख्यालय पर भी दमकल सेवाओं में काफी कमी है। यहां पर आग बुझाने के लिए केवल तीन ही गाड़ियां हैं। वे भी बड़ी। वहीं जिला के किसी भी कस्बे में दमकल की कोई गाड़ी नहीं हैं। ऐसे में कस्बों में यदि आगजनी की घटना हो जाती है तो उसके लिए नारनौल या महेंद्रगढ़ से ही गाड़ियां मंगानी पड़ेंगी। इसके अलावा तंग गलियों में जाने के लिए भी जिला में पर्याप्त गाड़ियां नहीं हैं।
विज्ञापन

दीपावली पर आगजनी की घटनाएं होना आम बात है। दीपावली से पूर्व भी बच्चों द्वारा छोड़े गए पटाखों आदि से आगजनी की घटनाएं होती रहती हैं, मगर इन घटनाओं से निपटने के लिए प्रशासन ने अभी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए हैं। वैसे दमकल विभाग ने अपनी सभी गाडिय़ों की छोटी-मोटी कमियों को दूर कर लिया है, मगर संस्थानों का अभी भी अभाव है। जिला में दमकल की केवल आठ गाड़ियां हैं। जबकि जिला में दो बड़े शहर, पांच कस्बे तथा आठ खंड व 370 गांव हैं। ऐसे में यदि आगजनी की घटनाएं बढ़ गई तो गाड़ियों की संख्या में कमी पड़ जाएगी। वहीं बड़ी घटनाओं में एक गाड़ी से काम नहीं चलने पर तीन से चार गाड़ियां भी लगा दी जाती हैं।

क्या है इस समय स्थिति
फिलहाल नारनौल मुख्यालय और महेंद्रगढ़ में ही दमकल की गाड़ियां हैं। इनमें नारनौल में तीन गाड़ियां दो दस-दस हजार लीटर और एक पांच हजार लीटर की गाड़ी चालू हालत में हैं, जबकि यहां तीन गाड़ियां कंडम हैं। जबकि महेंद्रगढ़ में पांच गाड़ियां हैं। इनमें से एक नई गाड़ी हाल ही में सितंबर माह में मिली है। इन गाड़ियों में पानी की क्षमता साढ़े चार हजार लीटर से दस हजार लीटर तक है।
विज्ञापन


मुख्यालय की कस्बों से दूरी है 15 से 25 किलोमीटर
जिला मुख्यालय में तीन ही गाड़ियां हैं, जबकि इसके तहत नांगल चौधरी, निजामपुर, अटेली कस्बों के अलावा सिहमा व गोद बलाहा जैसे बड़े कस्बानुमा गांव भी आते हैं। ऐसे में गोद बलाहा, सिहमा, अटेली व निजामपुर की नारनौल से दूरी 15-15 किलोमीटर है, जबकि निजामपुर और अटेली की ओर बार्डर तक गांवों की दूरी 40 किलोमीटर पड़ जाती हैं। वहीं सबसे अधिक दूरी पर नांगल चौधरी कस्बा है। इसकी दूरी 25 किलोमीटर है तथा बार्डर तक यह 45 किलोमीटर तक पड़ जाती है। ऐसे में बार्डर तक गाड़ी पहुंचने में काफी समय लग जाएगा।

पटाखों की बिक्री स्थल पर लगा दी जाएंगी गाड़ियां
जिला में आठ नवंबर से पटाखों की बिक्री शुरू हो जाएगी। ऐसे में एक-एक गाड़ी सभी पटाखा बिक्री केंद्रों पर भी लगा दी जाएगी। इसके कारण सभी गाड़ियां वहीं बुक हो जाएंगी। जिला में महेंद्रगढ़, नारनौल, अटेली, नांगल चौधरी, कनीना और सतनाली में पटाखा बिक्री स्थान निर्धारित किए जाएंगे। जहां पर आठ में से छह गाड़ियां बुक हो जाएंगी।

रोड भी नहीं दे रहे साथ
दमकल की गाड़ी सही रफ्तार से आने के लिए रोड सही होने चाहिए, मगर टूटे रोड भी किसानों का साथ नहीं दे रहे। एक फायर बिग्रेड कर्मी ने बताया कि वे तो स्पीड से गाड़ी ले जा सकते हैं तथा जिला के अंतिम गांव तक 25 से 30 मिनट में पहुंच सकते हैं, मगर रोड खराब होने की वजह से उनको गांवों में पहुंचने में काफी परेशानी होती है।

कस्बों में होनी चाहिए दमकल गाड़ियां
गांव मूसनौता, बायल, पांचनौता, सतनाली के गांव श्यामपुरा, जड़वा व अटेली के कांटी, खेड़ी आदि के अमीलाल, सुरेश कुमार, ज्ञानी प्रकाश, जयचंद, जगदीश प्रसाद आदि किसानों का कहना है कि दमकल की गाड़ियों की व्यवस्था कस्बों में भी होनी चाहिए, ताकि किसी अप्रिय घटना होने पर तुरंत ही गाड़ियां मौके पर पहुंच जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि कस्बों में भी दमकल की व्यवस्था की जाए।

कर्मचारी हैं, मगर सभी अस्थायी
वहीं दमकल विभाग के पास कर्मचारी हैं, मगर सभी अस्थायी। सभी ठेके पर लिए हुए हैं। कर्मचारियों की बात की जाए तो नारनौल व महेंद्रगढ़ में 16-16 फायर मैन तथा आठ-आठ चालक हैं। इसके अलावा नारनौल में एक लिडिंग फायरमैन भी है। जबकि स्थायी पोस्ट सभी रिक्त हैं।
दीपावली के मद्देनजर दमकल की सभी गाड़ियों की मरम्मत करा सही करा दिया गया है। नारनौल में तीन और महेंद्रगढ़ में पांच गाड़ियां हैं। वहीं सिलेंडर और फाम आदि की भी पूरी व्यवस्था है। दीपावली में आगजनी आदि जैसी समस्या से निपटने के लिए दमकल विभाग पूरी तरह तैयार है। यदि बच्चे पटाखे बड़ों की देखरेख में चलाएंगे तो हादसे भी कम होंगे।
विज्ञापन

-राकेश कुमार, फायर अफसर, जिला महेंद्रगढ़
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें