फोटो नंबर- 13मोहल्ला चांदूवाड़ा स्थित जर्जर हवेली, जिसे नगर परिषद की ओर से जारी किया गया ह
नारनौल। शहर में करीब 500 पुरानी हवेलियां ऐसी हैं जो 50 से 100 साल या उससे भी अधिक पुरानी हैं। समय के साथ इनमें से ज्यादातर जर्जर हो चुकी हैं। तेज बारिश और आंधी के दौरान इनके गिरने का खतरा बना रहता है। इन हवेलियों के आसपास से गुजरने वाले लोगों को हर समय हादसे की आशंका रहती है।
नगर परिषद की ओर से पुराने और जर्जर भवनों का सर्वे कराया जा रहा है लेकिन यह काम धीमी गति से चल रहा है। अब तक मिश्रवाड़ा में दो और चांदूवाड़ा में एक समेत कुल पांच हवेलियों को जर्जर घोषित किया गया है। संबंधित मालिकों को नोटिस भी जारी किए गए हैं।
पुराने समय में नारनौल की आबादी करीब नौ प्रमुख मोहल्लों तक सीमित थी। मिश्रवाड़ा, संघीवाड़ा, चांदूवाड़ा, फ्रांसखाना, बांस, आजाद चौक, चौधरियान, काठ, अनाज मंडी और लोहा मंडी क्षेत्र में सबसे ज्यादा पुराने भवन हैं।
गत वर्ष गिरा था हवेली का हिस्सा
गत वर्ष आजाद चौक में गांधी प्याऊ के पास एक पुरानी हवेलीनुमा दुकान का हिस्सा गिर गया था। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ, लेकिन दो बिजली के खंभे टूटने से दिनभर बिजली आपूर्ति बाधित रही।
पुराने भवनों की पहचान के लिए नगर परिषद सर्वे कर सूची पीडब्ल्यूडी को सौंपती है। पीडब्ल्यूडी जांच के बाद भवन को जर्जर घोषित करता है। इसके बाद नगर परिषद मालिक को नोटिस देती है। दो नोटिस के बाद भी भवन नहीं गिराने पर तीसरा नोटिस देकर परिषद स्वयं भवन गिराएगी और खर्च मालिक से वसूलेगी। लोगों से सुरक्षित तरीके से भवन गिराने की अपील की गई है।
-जोगेंद्र सिंह कालीरमना, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद, नारनौल।