नारनौल में विवाहित बेटी द्वारा पिता और भाइयों समेत चार के खिलाफ दर्ज दुष्कर्म के मामले में रेवाड़ी एसआईटी की रिपोर्ट आ गई है। रिपोर्ट में पिता, दो भाई और एक अन्य आरोपी को दोषी नहीं माना गया है और उनके खिलाफ नारनौल के महिला थाने में दर्ज मुकदमे को रद्द कर दिया गया है। जांच के लिए डीएसपी सतबीर सिंह के नेतृत्व में एसआईटी का गठन आईजी ममता सिंह के आदेश पर किया गया था। जिसके बाद एसआईटी ने मामले में शिकायकर्ता विवाहिता के भी बयान लिये थे।
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-आरटीआई एक्टिविटिस्ट के हस्तक्षेप के बाद मिला न्याय
मामले में पीड़ित पिता-पुत्र ने बताया कि उनके दामाद द्वारा दर्ज कराए गए झूठे मुकदमे के बाद वे कई महीने जेल में रहे। ऐसे में एक संबंधी के जरिये राजस्थान के कोटपुतली में रह रहे आरटीआई एक्टिविटिस्ट राव धनबीर सिंह को मामले का पता चला। मामले में हस्तक्षेप करते हुए उन्होंने पहले नारनौल एसपी हामिद अख्तर और बाद में आईजी दक्षिण रेंज ममता सिंह से बात की। जिसके बाद मामले की सघन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।
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-आरोपी पति के खिलाफ कर रही मामले की जांच
मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला के इकबालिया बयान और अन्य जांचों में आरोपी पिता और भाइयों के दोषी न पाए जाने के बाद पुलिस ने मामले में अब महिला के पति के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। मुकदमा दहेज उत्पीड़न, कुकर्म समेत विभिन्न अन्य धाराओं में दर्ज हुआ है। अब पुलिस झूठा मुकदमा दर्ज कराने के लिए उकसाने वाले पति समेत अन्य ससुरालीजनों के खिलाफ नए दर्ज हुए मामले की जांच में जुटी है।
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एसआईटी की जांच में पीड़िता के बयान लिए गए थे। उसने आरोपों को दबाव में देते हुए गलत बताया था। इसी के आधार पर मुकदमा रद्द कर दिया है।
सतवीर, जांच अधिकारी, एसआईटी