नारनौल। दो सप्ताह में मधुमक्खियों के डंक मारने के दो मामले सामने आ चुके हैं। इन दोनों मामलों में 40 लोगों को मधुमक्खियों ने घायल कर दिया। ऐसे में लघु सचिवालय व सिविल अस्पताल सहित अन्य सरकारी दफ्तरों की पड़ताल की गई तो सिविल अस्पताल में मधुमक्खियों के सबसे अधिक छत्ते पाए गए।
वहीं लघु सचिवालय में भी छत्ते लगे मिले। ऐसे में इन दोनों ही जगहों पर अगर मधुमक्खी हमला कर देती हैं तो प्रशासनिक अधिकारी आमजन की कैसे सुरक्षा करेंगे।
सिविल अस्पताल में पुरानी बिल्डिंग पर एक ही लाइन में 4 छत्ते लगे मिले। वहीं नई बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर एक, गायनी वार्ड के पास दो, एमएस ऑफिस के बाहर एक व गायनी वार्ड के बाहर पेड़ व बिल्डिंग पर छत्तों का अंबार लगा हुआ मिला। संवाद
मिनी सचिवालय में लगे दो छत्ते
मिनी सचिवालय की चौथी मंजिल पर एक ही जगह दो बड़े छत्ते लगे मिले। इन दोनों ही जगहों पर रोज हजारों लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सवाल उठता है कि किसी दिन मधुमक्खी हमला कर देती हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी।
एक्सपर्ट राय...जानलेवा तक साबित हो सकता है मधुमक्खी का डंक : फिजिशियन
फिजिशियन डॉ. जितेंद्र यादव ने बताया कि मधुमक्खी के डंक में एपिथॉक्सिन नामक विष होता है जिसमें मुख्य रूप से मेलिटिन, हिस्टामाइन और फॉस्फोलिपेज-ए2 शामिल हैं। यह जहर अम्लीय होता है जिसमें फॉर्मिक एसिड भी पाया जाता है। इसके डंक से तेज जलन, दर्द, सूजन, लालिमा और एलर्जी की प्रतिक्रिया होती है जो गंभीर मामलों में जानलेवा तक साबित हो सकती है। अगर किसी को मधुमक्खी डंक मार देती है तो वह तुरंत अपने नजदीकी अस्पताल में जाकर एपिनेफ्रिन का इंजेक्शन लगवाए। मधुमक्खी के डंक से किसी को एलर्जी है तो उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है और उसे आईसीयू तक में एडमिट करना पड़ सकता है।
मधुमक्खियां भूखी और अति संवेदनशील हो गई हैं : पर्यावरण विशेषज्ञ
पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के कारण मधुमक्खियां सहित सभी जीव जंतु आक्रामक हो रहे हैं। तापमान में वृद्धि और अनियमित बारिश से फूलों की कमी के कारण मधुमक्खियां भूखी और अति संवेदनशील हो गई हैं जिसके चलते ये अकारण ही हमला कर देती हैं।