महेंद्रगढ़। सामाजिक तानों का जाल तोड़कर ही महिलाएं सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंच सकती हैं। महिलाएं सामाजिक दबाव को अनदेखा कर परिजनों से संवाद करें और आत्मविश्वास व मेहनत के बल पर आगे बढ़ें।
यह बात वीरवार को अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से स्वरोजगार की राह में महिलाओं के लिए चुनौतियां व अवसर विषय पर आयोजित अपराजिता कार्यक्रम में सफल कारोबारी महिलाओं ने कही। यह आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र में हुआ।
वक्ताओं ने अपने संघर्ष और सफलता की कहानी साझा की। कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने वक्ताओं से सवाल पूछे और अपनी शंकाओं के समाधान भी पाए। कार्यक्रम में 30 महिलाओं ने भाग लिया। मुख्य अतिथि जिला विस्तार विशेषज्ञ डॉ. पूनम यादव रहीं जबकि बनारसी देवी, पूजा और जागृति ने विचार रखे।
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सफलता की कहानी, महिलाओं की जुबानी
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मैंने साल 2021 में प्रशिक्षण लेकर अचार का कारोबार शुरू किया। शुरू में लोगों ने काफी बातें कि बैग लेकर जाती हैं, घर का नाश होगा। अगर महिलाएं कमाने लगे तो पुरुषों को कौन पूछेगा। इस तरह के सामाजिक ताने अक्सर सुनने को मिले। अब 6 साल से काफी अच्छा कारोबार चल रहा है। साथ ही 20 अन्य महिलाओं को रोजगार मिला।
-बनारसी देवी, महिला उद्यमी
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अपने परिवार से काम करने की इच्छा जरूर साझा करें। अगर परिवार से बातें छिपाई जाएंगी तो परिवार सहयोग की बजाय बहिष्कार करेगा। जूट बैग का कारोबार परिवार की सहमति से ही शुरू किया था और आज परिवार का सहयोग तो मिल ही रहा है। जूट बैग प्रतिदिन 50 पीस बनाकर बेच रहे हैं।-पूजा देवी, जूट बैग कारोबारी
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शर्म व कमजोरी को भूलकर काम शुरू कर सकती हैं। मैंने भी हादसे में पैर टूटने के बाद कृत्रिम पैर लगवाया और अब बेकरी व साबुन का लघु उद्योग चला रही हूं। इसमें मेरे साथ गांव की 10 अन्य महिलाएं भी काम कर रही हैं। शुरू में लोगों ने मनोबल तोड़ा और तरह-तरह के सवाल पूछकर काम में बाधा डाली। -जागृति देवी, बेकरी व साबुन कारोबारी
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कृषि विज्ञान केंद्र की ओर प्रशिक्षण दिया जाता है। मैंने भी प्रशिक्षण लिया और आज मेहनत व लगन के दम पर सफल कारोबारी बन चुकी हूं। मेरे साथी जिन महिलाओं ने छोटे से शुरूआत की और वह अब प्रदेश में खुद तैयार किए उत्पाद को बेच रही हैं। -डॉ. पूनम यादव, जिला विस्तार विशेषज्ञ, केवीके
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महिलाओं व वक्ताओं के सवाल जवाब
मीरा- जूट बैग का काम कैसे शुरू करें?
पूजा का जवाब: जूट बैग के लिए 30 हजार रुपये की हैवी ड्यूटी मशीन आएगी। कच्चे माल की उपलब्धता महेंद्रगढ़ या दिल्ली से हो सकती है। इसके बाद प्रशिक्षण लें और सहयोगी महिलाएं बनाकर काम शुरू कर सकती हैं।
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ज्योति- साबुन कारोबार के लिए प्रक्रिया क्या है?
जागृति का जवाब: साबुन बनाने के लिए दिल्ली से कच्चा माल ला सकते हैं। इसके लिए शॉप बेस आता है और एक किलो में 10 साबुन बनती हैं। पहले साबुन बेस को पिघला लें और इसमें एलोवेरा, नीम, हल्दी, चंदन जैसे इच्छानुसार फ्लेवर मिलाकर सूखा लें।
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कांता- तैयार उत्पाद की बिक्री व प्रचार कैसे करें?
बनारसी का जवाब: बाजार में मांग के अनुसार सामान की बिक्री करें। ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ऑफर दें और सोशल मीडिया पर प्रचार करें। साथ ही महिलाएं भी प्रचार का बेहतर स्रोत हैं। जहां पर भी जाएं अपने उत्पाद साथ लेकर जाएं और लोगों में प्रचार करें।
पूजा- बजट की कमी कैसे दूर करें?
डॉ. पूनम यादव का जवाब: बजट की कमी दूर करने के लिए महिलाओं का समूह बनाएं। इसमें हर माह प्रत्येक महिला 100 रुपये एकत्र करे और हर माह इसी तरह राशि जुड़ती जाएगी। सरकार की ओर से भी स्वयं सहायता समूह को लोन दिया जाता है।
फोटो संख्या:52 अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद
फोटो संख्या:52 अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद
फोटो संख्या:52 अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद
फोटो संख्या:52 अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद
फोटो संख्या:52 अपराजिता कार्यक्रम में मौजूद महिलाएं। संवाद