बैंकों में कर्मचारियों की सैलरी आ गई है, मगर कैश नहीं होने के कारण कर्मचारियों के हाथ दिसंबर माह के पहले दिन कुछ भी नहीं लगा। शहर के अधिकांश बैंकों में माह के पहले दिन के चलते सुबह से दोपहर तक काफी भीड़ लगी रही, मगर लोगों को पैसे नहीं मिले। अधिकांश बैंकों में कैश की समस्या आ रही है। कई बैंकों में दस-दस रुपये की पुरानी गड्डी दी जा रही है। इससे लोग परेशान हैं।
दिसंबर माह की शुरूआत हो चुकी है। ऐसे में कर्मचारियों के एकाउंटों में उनकी सैलरी भी आनी शुरू हो गई है, मगर जिला के बैंकों में कैश की भारी किल्लत बनी हुई है। नोटबंदी के बाद वीरवार को 23 वे दिन भी नारनौल के अधिकांश बैंकों में कैश नहीं आया। जिसके कारण लोग परेशान हैं। कुछ एकआध बैंक में दो से चार लाख रुपये तक ही कैश पहुंचा। जिसको बैंक कर्मचारियों द्वारा दो-दो हजार रुपये करके बांटा गया। इससे लोगों की परेशानियां कम नहीं हुई।
-बाहर से नहीं आ रहा कैश
एक बैंक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बाहर से बिल्कुल भी कैश नहीं आ रहा। कुछ कैश स्टेट बैंक आफ पटियाला से लेकर काम चलाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि सोमवार से बैंकों में कोई भी नई करेंसी नहीं आई है। इसलिए लोगों को दस-दस व 50-50 रुपये के नोटों की गड्डी भी दी जा रही है।
-23 वें दिन भी लगी रही लाइनें
बैंकों में कैश भी नहीं था। कुछ मुख्य बैंकों में दो लाख तो कहीं तीन लाख रुपये तक कैश ही आया। इस कैश को पाने के लिए भी 23 वें दिन सुबह से दोपहर तक लाइनें शहर के मुख्य बैंकों के बाहर लगी रही।
-23 वें दिन नहीं खुले कोई एटीएम
वीरवार को 23 वें दिन शहर में कोई भी एटीएम नहीं खुले। जिसके कारण लोगों की परेशानी ज्यादा बढ़ गई। एटीएम नहीं खुलने के कारण लोगों का हाल बेहाल रहा।
नारनौल में नहीं स्वाइप का चलन
बेशक महानगरों में स्वाइप मशीन व पेटीएम के जरिये पेमेंट हो रही है। इससे लोगों को कुछ राहत मिल रही हो, मगर नारनौल शहर में इनका कोई खास चलन नहीं है। कुछ एक बड़े शोरूम व होटल संचालक ही स्वाइप मशीन रख रहे हैं। वे भी इन मशीनों को छुपाकर रखते हैं, उनका विश्वास ज्यादा कैश में ही है। वहीं पेटीएम जैसी कोई भी मांग नारनौल शहर में नहीं है। इस ओर दुकानदार कोई इंटरेस्ट भी नहीं ले रहे।