नारनौल। रोडवेज कर्मचारियों ने विभाग की ऑनलाइन तबादले नीति से असंतुष्ट है। रोडवेज कर्मचारी यूनियन के नारनौल डिपो प्रधान अनिल भीलवाड़ा ने कहा कि ऑनलाइन तबादले नीति में कर्मचारियों के साथ सरकार ने धोखा किया है। सरकार ने ऑनलाइन बदली से पहले कर्मचारियों से हां या ना का ऑप्शन मांगा था जिसमें जो कर्मचारी बदली करवाने के इच्छुक थे घर के नजदीक जाने के इच्छुक थे उन्होंने हां किया और जो बदली नहीं करवाने के इच्छुक थे उन्होंने ना किया था। उसके बाद जिन कर्मचारियों ने हां की थी उनको स्टेशन भरने के लिए पोर्टल खोला तो पाया कि जिन डिपो में कर्मचारी जाना चाहते थे उन डिपो का ऑप्शन खुल ही नहीं रहा था। इसमें कर्मचारी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। इतना ही नहीं जिन कर्मचारियों ने ऑप्शन में नहीं किया था उनका भी जबरदस्ती ट्रांसफर कर दिया गया है तथा बिना किसी आधार के नारनौल डिपो में जितने भी परिचालकों का ट्रांसफर हुआ है उनमें से 90 प्रतिशत परिचालक वहीं है जो बाहर डिपो में नौकरी करके आ चुके हैं। उन्हें दोबारा से विभिन्न डिपो में 250 से 300 किलोमीटर दूर दराज डिपो में ट्रांसफर कर दिया गया है। डिपो प्रधान ने बताया कि उनका ट्रांसफर इसी महीने की एक तारीख को यमुनानगर से नारनौल हुआ था अब उनका ट्रांसफर नारनौल से पलवल डिपो में कर दिया गया है। बिना किसी आधार के जबकि ट्रांसफर पॉलिसी में लिखा है कि एक बार ट्रांसफर हुए कर्मचारी को 3 साल तक एक स्टेशन पर रुकना जरूरी है। इस प्रकार ट्रांसफर पॉलिसी के सभी नियमों को ताक पर रख कर ट्रांसफर कर दिया गया है। डिपो प्रधान ने परिवहन मंत्री से आग्रह किया है कि इस मामले को संज्ञान में लेते हुए ट्रांसफर हुए कर्मचारियों की समस्या का समाधान करे।