फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

रेवाड़ी मार्ग पर दो बार लगाया जाम

Thu, 21 Jan 2016 12:24 AM IST
महेंद्रगढ़ / नारनौल
विज्ञापन
विज्ञापन
गोपाल गौशाला में लगातार दो दिन से हो रही गायों की मौत के बाद बुधवार को गोभक्तों ने गौशाला के बाहर प्रदर्शन कर रेवाड़ी रोड पर जाम लगा दिया। इस दौरान गोभक्तों और गौशाला प्रबंधन से जुड़े लोगों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं भी हुई। नाराज लोगों ने गायों की दुर्दशा और अकाल मौत के लिए गौशाला के प्रधान राजकुमार को अपने पद से त्याग पत्र देने की मांग की। गौशाला के बाहर दो बार लगाए जाम के कारण नई मंडी और पुलिस लाइन की तरफ जाने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। शाम तक गौशाला प्रबंधन और भक्तों में गायों की मौत के मामले कें हंगामा चलता रहा।  
विज्ञापन


गौ-भक्तों ने बताया कि सोमवार को 20 गायों की मौत के बाद से सामाजिक संगठन के लोग गौशाला में दिन और रात को गायों की हालात का जायजा ले रहे हैं, लेकिन गौशाला प्रबंधन की व्यवस्था से संतुष्ट नहीं हो पाए। मंगलवार को भी तीन-चार गायें मरी पाई गई। बुधवार को भी कई गायों की हालात दयनीय बनी हुई थी। इस पर सामाजिक संगठन और गौ-भक्तों ने एक बार फिर से गौशाला प्रबंधन पर उंगली उठाकर गौशाला प्रधान से अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की।  पहला जाम गोभक्तों ने शाम पांच बजे तक लगाया, उस समय आश्वासन मिलने के बाद जाम हटा दिया, थोड़ी देर बाद प्रधान के साथ बात बिगड़ जाने से उन्होंने साढ़े पांच से छह बजे तक फिर जाम लगाया। बाद में मौके पर पहुंचे तहसीलदार ईश्वर सिंह ने लोगों को समझा बुझाकर जाम खुलवाया।

गौभक्तों ने प्रधान से मांगा जवाब
समाजसेवी मनोज जांगड़ा, हेमंत चौबे, मनीष, जिले सिंह और सूरज गौड़ समेत अन्य लोगों ने गौशाला प्रबंधन से मांग की कि अगर गौशाला प्रबंधन से बीमार गायों की देखभाल नहीं हो पा रही है, तो वे उन्हें लिखित में दे कि वे गायों की देखभाल नहीं कर सकते हैं। इसके बाद वे अपने स्तर पर इन बीमार गायों की देखभाल और उपचार करेंगे। गौशाला प्रबंधन गौ-भक्तों की इस मांग का कोई जवाब नहीं दे पाया। गौ-भक्तों ने कहा कि प्रबंधन पद के लालच में अपने पद से इस्तीफा नहीं दे पा रहा है, क्योंकि गौशाला को गौसेवा के लिए नहीं बल्कि कमाई के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है।
विज्ञापन


लिखित में मांगी बैठक की तारीख
प्रधान के इस्तीफे को लेकर गौशाला कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का निर्णय लिया गया। गौ-भक्तों ने कार्यकारिणी की बैठक की तारीख निर्धारित कर लिखित में जानकारी देने की बात कही। गौ-भक्तों ने उक्त बैठक की कार्रवाई के लिए पत्र लिखकर गौशाला प्रधान को हस्ताक्षर करने के लिए दिया, लेकिन प्रधान ने उक्त मांग पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। इससे गौ-भक्तों का गुस्सा बढ़ गया और उन्होंने गौशाला के बाहर मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर गौशाला प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी।

कार्यकारिणी की बैठक के बिना नहीं दे सकते इस्तीफा
गौशाला व्यवस्था में सुधार नहीं करने पर जब लोगों ने गौशाला प्रधान को अपने पद से इस्तीफा देने की मांग की तो सदस्यों ने कहा कि बिना कार्यकारिणी की बैठक के प्रधान इस्तीफा नहीं दे सकते हैं, क्योंकि यह एक रजिस्टर्ड संस्था है। नियमानुसार प्रधान कार्यकारिणी बैठक में अपना इस्तीफा दे सकते हैं। इस पर लोगों ने कहा कि जब प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री जैसे पदों पर बैठे लोग मामूली कारण से अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, तो यह एक संस्था है।

सर्दी लगने से मरी सभी गायें
सोमवार को गौशाला में 15-20 गायों की मौत सर्दी लगने (निमोनिया होने) से हुई है। यह खुलासा गायों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद हुआ है। वहीं गौशाला प्रधान ने गायों के मरने का कारण पालीथिन खाना बताया था, लेकिन बुधवार को जब सामाजिक संगठन और गौशाला प्रबंधन की बैठक चल रही थी तो एक गौ-भक्त गायों के खिलाने के लिए बनाया गया चारा डालने के स्थान में से एक पालीथिन निकालकर प्रधान के सामने लेकर पहुंचा और उनसे जवाब मांग। इसका गौशाला प्रधान और प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं था।

एसडीएम से मिली गौशाला कार्यकारिणी
दो तीन दिनों से गौशाला में चल रहे घटनाक्रम पर सफाई देने के लिए बुधवार को गौशाला कार्यकारिणी के सदस्य एसडीएम विवेक कालिया से मिलने पहुंचे। इस दौरान गौशाला कार्यकारिणी के सदस्यों ने एसडीएम को बताया कि नगर परिषद द्वारा छोड़े लावारिस पशुओं के बाद से गौशाला की व्यवस्था गड़बड़ा गई है। गौशाला कार्यकारिणी सदस्यों ने कहा कि सोमवार को 5-7 गायों की ही मौत हुई, जबकि मीडिया इसे बढ़ा चढ़ाकर प्रकाशित कर रहा है। इस पर एसडीएम ने कहा कि वे अपना कार्य इमानदारी से करें। गौशाला प्रबंधन ने एसडीएम से मांग की कि उनके पास लेबर की कमी है। इसलिए नगर परिषद कुछ कर्मचारियों को गौशाला में सहायता के लिए भेजा जाए। वहीं पशु चिकित्सकों का भी प्रबंध किया जाए, ताकि गायों की सही प्रकार से देखभाल हो सके।

गौ-भक्तों ने गौशाला प्रबंधन को दिए सुझाव
बैठक के दौरान लोगों ने गौशाला प्रबंधन को गायों के बैठने, खाने व साने के स्थान की प्रतिदिन साफ-सफाई हो, गायों को पीने के लिए स्वच्छ पानी दिया जाए। वहीं प्रतिदिन टैपों के माध्यम से गायों के खाने के लिए लाई जाने वाली सामग्री की अच्छी से देखभाल कर गायों को खिलानी चाहिए। गायों के बैठने की जगह गिली न हो इसके लिए बैठने के स्थान पर मिट्टी की व्यवस्था की जाए। वहीं सर्दी से बचाव के लिए टीन शेडों के चारों ओर तिरपाल की व्यवस्था करने के सुझाव दिए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें