श्रीकृष्णा स्कूल के पास कुराहवटा रोड पर टाटा 407 गाड़ी पलट जाने से छह छात्राओं समेत 11 लोग घायल हो गए। घायलों को आनन-फानन सिविल अस्पताल महेंद्रगढ़ लाया गया यहां से चिकित्सकों ने छह को पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया। सभी घायल गांव रिवासा के बताए जा रहे हैं। वे मजदूरी करते हैं। घायल छात्राएं भी इन्हीं के परिवार की हैं वे स्कूल के बाद परिजनों का हाथ बंटाने गईं थीं।
गांव कुरावहटा में गांव रिवासा की महिलाएं एवं पुरुष मजदूरी पर लावनी करते है। रविवार को वे शाम के समय कपास चुग कर टाटा 407 में बैठकर अपने गांव रिवासा आ रहे थे। अभी वे महेंद्रगढ़ पहुंचने वाले ही थे कि श्रीकृष्णा स्कूल के पास गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया। संतुलन बिगड़ जाने से गाड़ी पलटी गई। इस हादसे में 11 लोग घायल हो गए। घायलों को राहगीरों ने सिविल अस्पताल महेंद्रगढ़ पहुंचाया। जहां पर चिकित्सकों ने छह घायलों को हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। बाकी पांच सिविल अस्पताल में उपचाराधीन हैं। घायलों में पांच छात्राएं भी शामिल हैं। घटना के बाद गाड़ी का ड्राइवर गाड़ी छोड़कर फरार हो गया।
ये हैं घायल
घायलों में बबली पुत्री रामकिशन (17), शीला पत्नी धर्मचंद (35), ललीता पुत्री रोहताश,( 18), प्रतिमा पुत्री रोहताश (14 ), सरला पुत्री रोहताश (13 ) हो गई। इन सभी का सिविल अस्पताल महेंद्रगढ़ में उपचार चल रहा है। इनमें से बबली कक्षा 10, ललिता 12वीं, प्रतिमा 9वीं, सरला 9वीं कक्षा की छात्राएं हैं। ये सभी छात्राएं पढ़ने के साथ साथ अपने परिजनों का हाथ भी बंटाती हैं।
इनको किया रेफर
चिकित्सकों ने गाड़ी के परिचालक सहित छह घायलों को उनकी गंभीर हालत को देखते हुए हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया है। इनमें मनीषा पुत्री धर्मचंद (17), रेवती पुत्री सागर ( 19), भतेरी पत्नी राकेश (32 ), रेवती पत्नी मदनलाल (30 ), बस्ता पुत्री सागरमल (15 ), मनोज पुत्री सागरमल तथा मनोज पुत्र छित्तर सिंह (35) कुराहवटा शामिल हैं।
ग्रामीण पहुंचे अस्पताल
जैसे ही घटना की सूचना घायलों के परिजनों को लगी तो परिजन सिविल अस्पताल पहुंचे। ग्रामीण अपने निजी साधनों से अस्पताल पहुंचे और वहां पर घायलों की मदद की। पूरे अस्पताल में भारी भीड़ हो गई। इस दौरान निवर्तमान जिला परिषद् प्रमुख सुरेंद्र कौशिक भी अस्पताल पहुंचे और उन्होंने घायलों का हालचाल पूछा।
एक चिकित्सक ने ही किया उपचार
सिविल अस्पताल में चिकित्सकों की कमी महसूस की गई। रविवार की छुट्टी होने के कारण इमरजेंसी में मात्र केवल एक ही चिकित्सक था। जबकि घायल 11 थे। इन घायलों में 6 की हालत ज्यादा गंभीर बनी हुई थी। इस दौरान तीन स्टाफ नर्सों ने चिकित्सक की सहायता की। डा. प्रदीप ने घायलों को प्राथमिक उपचार दिया।