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बदला मौसम, अब होगी बीजाई

Tue, 27 Oct 2015 01:19 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला नारनाैल
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नारनौल। तीन चार दिनों से अचानक मौसम में हुए परिवर्तन के बाद किसान खुश हैं। मौसम में परिवर्तन के साथ ही किसान रबी की फसल की बिजाई में जुट गए हैं। रबी के मौसम में क्षेत्र में सबसे ज्यादा सरसों की फसल की बुआई होती है। इसकी बुआई का इस बार समय निकल गया है, मगर अब तीन-चार दिन से मौसम में आई ठंडक के बाद किसान इस फसल की बुआई करने लगे हैं हालांकि अभी न्यूनतम तापमान में ही गिरावट दर्ज की जा रही है। मगर क्षेत्र में चल रही ठंडी हवाओं से दिन के समय भी तेज धूप महसूस नहीं हो रही।
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इस बार बरसात न होने के कारण जिला के किसान चिंतित हैं। आमतौर पर सितंबर और अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में बरसात हो जाती है। इसके बाद क्षेत्र के किसान रबी की फसल की बुआई में जुट जाते हैं, मगर इस बार बरसात न होने के कारण तथा मौसम में गर्म होने के कारण किसान रबी की फसल की बुआई में नहीं जुटा था, वहीं बिजाई का मौसम आधे से ज्यादा चला भी गया है। इसके बावजूद जिले में केवल 50 हजार एकड़ पर ही सरसों की बुआई हो पाई थी, जबकि आधा रकबा खाली था। इनमें अधिकतम बुआई महेंद्रगढ़, कनीना, सतनाली और अटेली क्षेत्र में हुई थी। वहीं नांगल चौधरी, निजामपुर, नारनौल व गोद बलाहा क्षेत्र की बारानी भूमि में बिजाई नहीं हो पाई थी।

एक लाख हेक्टेयर में बोई जाती है सरसों
जिला में रबी की फसल की बिजाई का यह मुख्य समय है। जिला में मुख्य रूप से सरसों की फसल की बुआई होती है। सरसों की फसल जिला में एक लाख हेक्टेयर में की जाती है। वहीं कृषि विभाग के अनुसार इसकी बिजाई का मुख्य समय 15 अगस्त से दस सितंबर व एक अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक होता है। जहां तापमान कम होने लग जाता है, वहां यह फसल दस सितंबर तक तथा जहां तापमान ज्यादा रहता है, वहां यह फसल 20 अक्टूबर तक बोई जाती है। मगर जिला इस बार 25 अक्टूबर बीत जाने के बाद भी 50 प्रतिशत फसल पर ही बुआई नहीं हुई है।
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सरसों के लिए 25 डिग्री से कम होना चाहिए तापमान
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार सरसों की बुआई के समय अधिकतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से अधिक नहीं होना चाहिए। वहीं न्यूनतम तापमान भी 15 डिग्री के करीब होना चाहिए। इस समय न्यूनतम तापमान 15 से 16 डिग्री के आसपास बना हुआ है। इसके कारण अब सरसों की फसल की बुआई अच्छे से किसान कर सकते हैं।

बरसात का है इंतजार
यहां पर करीब 25 हजार हेक्टेयर बारानी भूमि पर सरसों की फसल बोई जाती है। इस समय बरसात न होने के कारण बारानी क्षेत्र में फसल बोने के लिए किसान बरसात का इंतजार कर रहे हैं। दो दिन से मौसम में बदलाव से किसानों को बरसात की उम्मीद बढ़ी है। ऐसे में उन्होंने अपने खेतों को तैयार करना शुरू कर दिया है।

25 हजार एकड़ रकबा हो सकता है प्रभावित
भूजल रिचार्ज नहीं होने के कारण मूलोदी, बिगोपुर, खातोली, नांगल पीपा, धोलेड़ा, मेघोत, सिलारपुर, भोजावास, भुंगारका, सिरोही बहाली,नांगल कालिया, मोहनपुर, नंगली, मुरारीपुर, कांवी, मामराज की ढ़ाणी व खानपुर समेत 40 गांवों की 25 हजार एकड़ से अधिक बीजाई प्रभावित होने की संभावना है।

इतने रकबे में होती है बिजाई
सरसों        एक लाख हेक्टेयर
गेहूं           50 हजार हेक्टेयर
चना          15 हजार हेक्टेयर
जौ            02 हजार हेक्टेयर

ये है तापमान का हाल
दिन    अधिकतम   न्यूनतम
20 अक्टूबर   34      19.5
21 अक्टूबर   34      19.0
22 अक्टूबर   34      16.5
23 अक्टूबर   34      13.5
24 अक्टूबर   34      16.0
25 अक्टूबर   34      16.5
यह समय सरसों की बिजाई का है। हालांकि सरसों की अगेती फसल की बिजाई का समय निकल गया है, मगर अब मौसम बिजाई के लिए एकदम परफेक्ट है। किसानों को सरसों की बिजाई का काम पूरा कर देना चाहिए।
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-संजय यादव, एसडीओ, कृषि विभाग, नारनौल
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