फोटो नंबर- 16मोहल्ला चांदूवाड़ा स्थित पाठशाला के बच्चों के लिए धर्मशाला में बनाए गए शौचालय ज
नारनौल। मोहल्ला चांदूवाड़ा की प्राथमिक पाठशाला के एक कमरे में 27 बच्चे बुनियादी सुविधाओं के अभाव में पढ़ाई कर रहे हैं। स्कूल में बच्चों के लिए शौचालय नहीं है। मजबूरी में उन्हें स्कूल के बाहर स्थित धर्मशाला के जर्जर शौचालयों का इस्तेमाल करना पड़ता है। इससे पांच साल में बच्चों की संख्या आधी से ज्यादा घट गई।
स्कूल भवन में केवल दो कमरे और एक बरामदा है। जगह की कमी के कारण एक ही कमरे में बच्चों की पढ़ाई होती है। इसी कमरे में बच्चों के लिए खाना बनाया जाता है और बर्तन भी धोए जाते हैं। गैस सिलिंडर समेत अन्य सामान भी कमरे में रखा रहता है। भरा हुआ सिलिंडर बच्चों की बेंच के पास रखा होने से हादसे का खतरा बना रहता है।
शिक्षा विभाग ने धर्मशाला समिति की सहमति से शौचालय और पानी की टंकी बनवाई थी लेकिन शौचालय लंबे समय से जर्जर हैं। प्लंबर का काम भी अधूरा पड़ा है। ऐसे में बच्चे सुरक्षित और स्वच्छ शौचालय की सुविधा से वंचित हैं।
स्कूल में खेल मैदान भी नहीं है। बच्चों को पढ़ाई के साथ खेल और शारीरिक गतिविधियों के लिए भी उचित जगह नहीं मिल रही। अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की शिक्षा और सुरक्षा को देखते हुए स्कूल में जल्द सुरक्षित शौचालय, अलग किचन, पर्याप्त कमरे और खेल मैदान की व्यवस्था होनी चाहिए।
60 से अधिक से घटकर 27 रह गई संख्या
पाठशाला में पांच वर्षों में विद्यार्थियों की संख्या 50 फीसदी से अधिक घट गई है। पांच साल पहले यहां 60 से ज्यादा बच्चे पढ़ते थे लेकिन अब संख्या घटकर महज 27 रह गई है। स्कूल भवन की खराब स्थिति और बुनियादी सुविधाओं की कमी देखकर कई अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला कराने से बच रहे हैं।
वर्जन:
जिले में स्थित स्कूलों में शौचालयों को बेहतर बनाने के लिए बच्चों की संख्या व आवश्यकता अनुसार प्रत्येक स्कूल में 25 से 50 हजार रुपये मरम्मत के लिए खर्च किए जा रहे हैं। चांदूवाड़ा स्थित प्राथमिक पाठशाला के शौचालय की मरम्मत के लिए 25 हजार की मंजूरी मिली थी और अधिकतर मरम्मत कार्य पूरा हो चुका है।
-अशोक कुमार शर्मा, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, नारनौल