नारनौल। जिला एवं सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सूरा ने गांव अमरपुर जोरासी की ग्राम पंचायत की अपील को खारिज करते हुए नाथू राम और संत लाल के पक्ष में निचली अदालत का फैसला बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट किया कि विवादित जमीन आबादी देह में आती है। इस पर पंचायत का अधिकार नहीं बनता।
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिस जमीन पर विवाद है, वह आबादी देह में आती है और इस पर ग्राम पंचायत का कोई अधिकार नहीं बनता। ऐसे में पंचायत की ओर से जारी किए गए नोटिसों को पहले ही निचली अदालत ने रद्द कर दिया था जिसे अब जिला अदालत ने भी सही ठहराया।
नाथू राम और संत लाल पिछले करीब 60-70 वर्षों से उक्त जमीन पर रह रहे हैं और वहां पक्के कमरे व टिन शेड बने हुए हैं। उन्होंने अदालत में दलील दी थी कि यह जमीन आबादी देह का हिस्सा है जहां गांव के अन्य लोगों के भी मकान बने हुए हैं।
वहीं, ग्राम पंचायत का कहना था कि यह जमीन शामलात देह है और उस पर उसका मालिकाना हक है। पंचायत ने दावा किया था कि ग्रामीणों का कब्जा अवैध है और उन्हें हटाने के लिए नोटिस जारी किए गए थे।
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि कानून के अनुसार आबादी देह को शामलात देह में शामिल नहीं किया जाता। इसलिए ग्राम पंचायत का इस जमीन पर कोई अधिकार नहीं बनता और वह ग्रामीणों को बेदखल नहीं कर सकती। फैसले के साथ ही अदालत ने पंचायत की अपील खारिज कर दी और निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा।