नारनौल। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) की सोमवार को नारनौल में हुई समीक्षा बैठक में लापता बच्चों की तलाश और उनके पुनर्वास से संबंधित जानकारी ली गई। प्राधिकरण की सह सचिव नीलम कुमारी ने बच्चे के लापता होने की सूचना पर तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया।
बैठक की अध्यक्षता मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-सह-सचिव, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण नीलम कुमारी ने की। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण दिशा-निर्देशों की जानकारी दी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि बच्चे के गायब होने की सूचना पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
मॉडल प्रॉसिक्यूशन स्कीम (संशोधित 2022) का लक्ष्य आपराधिक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाना है। इसका उद्देश्य विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाना और पीड़ितों को समय पर न्याय उपलब्ध कराना है।
पुलिस का काम केवल बच्चे को ढूंढना नहीं, बल्कि बरामदगी के बाद उसकी मनोवैज्ञानिक काउंसिलिंग और सुरक्षित सामाजिक पुनर्वास भी है। यदि बच्चा अपराध या शोषण का शिकार पाया जाता है, तो उसे पीड़ित क्षतिपूर्ति योजना के तहत वित्तीय और कानूनी सहायता मिलेगी। नीलम ने जोर दिया कि गुमशुदा बच्चों को परिजनों तक पहुंचाना प्राथमिक कर्तव्य है।