फारेस्ट विभाग में धांधली पर अंकुश लगाने के लिए रिकॉर्ड आनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। रिकार्ड आनलाइन होने से योजनाओं को क्रियान्वित करने में पारदर्शिता आएगी और विभिन्न केसों की जानकारी विभाग की वेबसाइट पर भी उपलब्ध रहेगी।
पर्यावरण को साफ-सुथरा रखने के लिए फारेस्ट विभाग हर साल भारी संख्या में पौधों का रोपण करता है। पौधों की सुरक्षा और देखभाल पर भी लाखों रुपये खर्च होते हैं। भरसक प्रयासों के बावजूद क्षेत्र में हरियाली नहीं बढ़ रही। एक आंकड़े के मुताबिक 50 प्रतिशत पौधे लगाने के कुछ दिन में ही नष्ट हो जाते हैं। कुछ सर्दी या पानी के अभाव में खराब हो जाते हैं। वहीं विभागीय रिकार्ड में नष्ट पौधों की प्रोग्रेस जारी रहेगी और उनकी सुरक्षा और सिंचाई पर लगातार बजट खर्च दिखाया जाता है। इससे धांधली की संभावना लगातार बढ़ जाती है। इस पर रोक लगाने के लिए विभाग ने रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की तैयारी की है।
ये रिकॉर्ड होगा ऑनलाइन
सरकार ने विभाग को तमाम योजनाएं, रिकार्ड, बजट, पौधारोपण, क्षेत्रफल, पहाड़, अरावली रकबा, पौधों की संख्या आनलाइन करने के आदेश दिए हैं। साथी चालान या अन्य कार्रवाई की जानकारी भी अपलोड होगी। आनलाइन रिकार्ड पर उच्च अधिकारियों की नजर रहेगी और इसमें फेरबदल संभव नहीं होगा।
24 घंटे में अपडेट करना जरूरी
चालान को 24 घंटे में आनलाइन करना होगा, जुर्माना राशि का विवरण भी वेबसाइट पर देना होगा। इससे कटिंग या आरोपी को फायदा पहुंचाने की गुंजाइश नहीं रहेगी। जो केस कोर्ट में दायर हो चुका, उनकी तारीख संबंधित सूचना वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। स्वच्छ भारत अभियान के क्रियान्वयन के लिए जुलाई में पौधारोपण अभियान की तैयारी शुरू कर दी है।