नारनौल। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के इमरजेंसी के विरोध में पूरे देश में आंदोलन शुरू हो गया था। विशेषकर अहीरवाल से विरोध की आवाज बुलंद करने वालों में युवा नेता प्रो. रामबिलास शर्मा प्रमुख थे। आज भी इमरजेंसी को याद कर पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के रोंगटे खड़े हो जाते हैं।
प्रो. रामबिलास शर्मा ने बताया कि 1975 में जनसंघ के संगठन महामंत्री थे। प्रेमचंद गोयल प्रांत प्रचारक, डॉक्टर अशोक गर्ग विभाग प्रचारक के निर्देशन में रामबिलास शर्मा रोहतक में सत्याग्रह का संचालन करते थे। एक जत्था, जिसमें लाला अमरचंद, भगवान दास बंसल, मदनलाल हरदोई, प्रोफेसर श्याम पसरिजा, जगदंबा प्रसाद, रमेश चंद्र सहित लगभग आठ लोग शामिल थे, जो कई दिन से गायब थे।
इमरजेंसी के दौरान पुलिस ने न इनकी कोई गिरफ्तारी दिखाई ना इन्हें अदालत में पेश किया। उन्हें अवैध रूप से पुलिस हिरासत में रखा गया। उस समय नाहड़ झज्जर जिले में पुलिस चौकी हुआ करती थी। रामबिलास शर्मा को जिम्मेदारी दी गई कि वे चौकी के सामने जाकर सत्याग्रह करें।
30 नवंबर 1975 को रामबिलास शर्मा ने पुलिस चौकी के सामने सत्याग्रह किया। वहां लगभग 100 पुलिस के जवानों सहित डीएसपी गुरबख्श लालपुरी भी मौजूद थे। रामबिलास शर्मा जब वहां इस जत्थे को अदालत में पेश करवाने के लिए नाहड़ थाने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। यातनाएं दी गईं।
पुलिस के उत्पीड़न से रामबिलास शर्मा बेहोश हो गए थे। उनके मुंह व कानों से खून बहने लगा। नाहड़ पुलिस ने रिमांड लेने के लिए रामबिलास शर्मा को 4 दिसंबर 1975 को रात 8: 30 बजे मजिस्ट्रेट के आवास पर पेश किया। अदालत ने पुलिस को रामबिलास शर्मा का 8 दिन का रिमांड दे दिया।
जहां रामबिलास शर्मा को 8 दिन के पुलिस रिमांड पर अंबाला इंटेरोगेशन सेंटर में भेज दिया गया। वहां पर रामबिलास शर्मा को बहुत अधिक यातनाओं का सामना करना पड़ा। रामबिलास शर्मा ने किसी तरह एक पत्र लिखकर वहां कार्यरत एक कर्मचारी के माध्यम से प्रेमचंद गोयल को भिजवाया।
प्रेमचंद गोयल तथा पत्नी अन्नपूर्णा ने उस समय तानाशाही से जूझता हरियाणा पुस्तक लिखी। इसमें इमरजेंसी के दौरान रामबिलास शर्मा व अन्य लोगों के साथ की गई तानाशाही का भी वर्णन लिखा है। बाद में रामबिलास शर्मा को मीसा के तहत रोहतक जेल लाया गया, वहां पर बीजू पटनायक, चौधरी देवीलाल, स्वतंत्रता सेनानी पंडित श्रीराम शर्मा व पीलू मोदी भी जेल में बंद थे। उन सब ने रामबिलास शर्मा की हालत देखी और उन्हें गंभीर अवस्था में मेडिकल रोहतक भिजवाया।
रोहतक मेडिकल के बाद पूर्व शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा को अंबाला सेंट्रल जेल भिजवा दिया। अंबाला जेल से रामबिलास शर्मा को बिहार के गया जेल भिजवा दिया। उस समय दूरभाष व अन्य टेक्नोलॉजी का जमाना नहीं था। रामबिलास शर्मा के मां-बाप उन्हें खोजने के लिए दर-दर भटकते रहे। बाद में उन्हें किसी तरह पता चला की उनके बेटे को तो अंबाला में बंद कर रखा था और अब उन्हें बिहार भेज दिया गया है।
देश में 18 मार्च 1977 को चुनाव हुए और 20 मार्च को चुनाव परिणाम आए देश में कांग्रेस का सफाया हो गया। इंदिरा गांधी, संजय गांधी और बंसीलाल चुनाव हार गए। 22 मार्च 1977 को रामबिलास शर्मा को बिहार की गया जेल से रिहा कर दिया गया।