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रिमाइंडर के बाद भी विसरा के सैंपल नहीं ले गई राजस्थान पुलिस

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विसरा सैंपल भेजने में जिले की ही पुलिस नहीं बल्कि राजस्थान पुलिस भी लापरवाह है। नारनौल व महेंद्रगढ़ से सटे राजस्थान जिलों के कई मामलों में नागरिक अस्पताल में पोस्टमार्टम होता है। उसके बाद विसरा जांच के लिए राजस्थान पुलिस इसे करीब चार-पांच महीने बाद ले जाती है।
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जिला नागरिक अस्पताल में नीमकाथाना, सिंघाना, खेतड़ी व बहरोड के लोगों का राजस्थान पुलिस पोस्टमार्टम करवाती है। सूत्रों के अनुसार इस साल लगभग 20-25 लोगों का पोस्टमार्टम हो चुका है। उसमें से 10 लोगों की मौत का कारण जानने के लिए विसरा सैंपल लिए थे। लेकिन अभी भी राजस्थान पुलिस तीन चार मामलों को लेकर नहीं गई है। एक-दो मामलों में खेतड़ी पुलिस को रिमाइंडर भी भेजा जा चुका है। लेकिन पुलिस इसके बाद भी लापरवाही बरतती है। विसरा सैंपल लैब में लेट पहुंचाने से रिजल्ट प्रभावित हो जाता है। जिसका खामियाजा पीड़ित लोगों को झेलना पड़ता है।
बता दें कि जिला नागरिक अस्पताल में इस साल नवंबर तक 227 लोगों के पोस्टमार्टम हुए हैं। इस दौरान 72 लोगों के विसरा जांच के लिए गए हैं। इसमें से पांच के विसरा लैब भेजने हैं। डॉक्टरों का मानना है कि विसरा जितना जल्द लैब को भेज दिया जाए, बेहतर होता है। देर से भेजने पर रिजल्ट प्रभावित हो सकता है। जिला अस्पताल के फॉरेसिंक एक्सपर्ट व मोर्चरी प्रभारी डॉ. हर्ष चौहान ने बताया कि जून 2018 में नारनौल में कार्य संभाला था। बताया कि पिछले साल 147 पोस्टमार्टम हुए थे। जिसमें से 45 विसरा भेजे गए थे। कार्य संभालने के बाद काफी पेडिंग बिसरा भेजे गए थे। इस साल नवंबर तक 227 पोस्टमार्टम हुए, जिसमें में 72 लोगों के विसरा लिए गए हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट थाने में भेजी जाती है। ऐसे में कितने मामले की रिपोर्ट आई, इसकी सही जानकारी नहीं मिल पाती है।
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